सुरक्षा मानकों का पालन होता तो 15 लोगों की जान नहीं जाती: अखिलेश यादव

लखनऊ,23 जून 2026 (यूएनएस)। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में घायल छात्रों और अन्य लोगों का हालचाल जानने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को केजीएमयू पहुंचे। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि अपनों को खोने का दर्द दुनिया का सबसे बड़ा दुख होता है और यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।

अखिलेश यादव ने कहा कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की वजह से 15 लोगों की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत अहंकार और लापरवाही के कारण कुछ लोग किसी की सुनना नहीं चाहते, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है। वह जिस घायल युवक से मिलकर आए हैं, वह जान बचाने के लिए खिड़की से नीचे कूद गया था और उसे गंभीर चोटें आई हैं। उसके परिजनों ने बताया कि उसकी मां नहीं है और इलाज लंबा चलेगा।

वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जब तक वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता, तब तक उसे वेतन के बराबर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए और उसके इलाज की पूरी व्यवस्था सरकार करे। सपा प्रमुख ने कहा कि जिन बच्चों की मौत हुई है, वे 21-22 वर्ष की उम्र के थे और अपने भविष्य को संवारने के लिए मेहनत कर रहे थे। सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।

अखिलेश यादव ने कहा कि पिछले दस वर्षों में हर घटना के बाद एसआईटी का गठन किया गया, लेकिन सवाल यह है कि यदि सरकार है तो नियमों का पालन क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने नक्शे पास किए, फायर एनओसी जारी की और नियमों की अनदेखी की, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार मानकों पर हावी हो गया है और जब भ्रष्टाचार व्यवस्था पर हावी हो जाता है तो ऐसे हादसे सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि यह सरकार भ्रष्टाचार से बनी है और भ्रष्टाचार ही कर रही है। अखिलेश यादव ने लेवाना होटल अग्निकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर बुलडोजर चलाने की बात कही थी, लेकिन क्या वास्तव में उस भवन पर बुलडोजर चला? उन्होंने कहा कि गरीबों की बस्तियों पर बुलडोजर चलाया जाता है, लेकिन बड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने कहा कि अकबर नगर में लोगों को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया, लेकिन अब सवाल यह है कि ऐसे मामलों में बुलडोजर किसका इंतजार कर रहा है। सपा प्रमुख ने कहा कि इस पूरे मामले में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है, लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आगे कर दिया है और अब मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा कि फायर एनओसी, ध्वस्तीकरण और अन्य कमियों के बावजूद ऐसे भवन कैसे संचालित होते रहे। उन्होंने मांग की कि लखनऊ में जिन-जिन भवनों के नक्शे पास हुए हैं और जिन्हें फायर एनओसी दी गई है, उन सभी की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस घटना के बाद अब छापेमारी के नाम पर अधिकारियों द्वारा फिर से वसूली का खेल शुरू होगा। उन्होंने कहा कि एनओसी प्राप्त करने और नक्शा पास कराने की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए और यह देखा जाना चाहिए कि आखिर कौन अधिकारी केवल अपनी जेब भरने में लगे थे। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से संबंधित एसआईटी रिपोर्ट पर पूछे गए सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि सिंधी समाज द्वारा दी गई चांदी की सिलाओं, सोने की ईंटों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का हिसाब-किताब रिपोर्ट में है या नहीं।

हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल यह समय उस विषय का नहीं है, बल्कि 15 लोगों की मौत से जुड़े इस दुखद हादसे पर बात करने का समय है। उन्होंने एसआईटी पर तंज कसते हुए कहा कि हर घटना में एसआईटी बना दी जाती है, लेकिन जवाबदेही तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता जवाब देगी और सरकार के दिन गिने-चुने रह गए हैं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *