पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में हरभजन सिंह सुरक्षा मामला पर हाई कोर्ट सख्त, पंजाब सरकार से मांगा जवाब

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा में तैनात 23 पंजाब पुलिस कर्मियों को लेकर पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि आधिकारिक स्वीकृति केवल आठ पुलिसकर्मियों की होने के बावजूद 15 अतिरिक्त कर्मियों को किस आधार पर “अनौपचारिक” रूप से तैनात किया गया।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार हरभजन सिंह की सुरक्षा के लिए केवल आठ पुलिसकर्मियों की मंजूरी दिखाई देती है, जबकि 15 अन्य कर्मियों को कथित रूप से सार्वजनिक धन के खर्च पर अतिरिक्त रूप से लगाया गया।

अदालत ने संकेत दिए कि वह इस मामले को केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि पंजाब में बढ़ती वीआईपी सुरक्षा संस्कृति की व्यापक जांच भी करेगी। हाई कोर्ट ने मोगा जिले में यह जानकारी जुटाने के निर्देश दिए कि कितने लोगों को सुरक्षा कवर दिया गया है और उनके साथ कितने पुलिसकर्मी आधिकारिक तथा अनौपचारिक रूप से तैनात हैं।

अदालत ने पंजाब पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) और मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि याचिकाकर्ताओं अथवा उनके परिवारों को किसी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि दो आदेशों के तहत आठ पुलिसकर्मियों की तैनाती स्वीकृत थी, जबकि 15 अन्य कर्मियों को सरकारी खर्च पर अनौपचारिक रूप से लगाया गया। मामले की अगली सुनवाई 20 मई को होगी। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अब इस मामले में किसी प्रकार का और स्थगन नहीं दिया जाएगा।

अपनी याचिका में हरभजन सिंह ने कहा कि उनकी सुरक्षा वापस लेने का आदेश बिना किसी नए खतरे के आकलन और बिना सुनवाई का अवसर दिए जारी किया गया। उन्होंने बताया कि वह 10 अप्रैल 2022 को आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे और वर्तमान में जालंधर में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा अंतर भी उजागर हुआ। एक ओर एक सांसद को 23 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा मिली हुई थी, जबकि दूसरी ओर कथित गैंग हमले से बचे एक व्यक्ति को केवल दिन के समय एक सहायक उपनिरीक्षक की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

संबंधित मामले में सरकारी परिवहन और श्रम ठेकेदार तथा जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष ने गैंग से जान का खतरा बताते हुए अपने और परिवार की सुरक्षा की मांग की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरमान सग्गर ने अदालत को बताया कि एक नवंबर 2025 को मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर गोलीबारी की थी। घटनास्थल से छह खाली कारतूस बरामद किए गए थे और अगले दिन सुल्तानपुर लोधी थाना में भारतीय न्याय संहिता और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि बाद में एक व्यक्ति ने खुले तौर पर घटना की जिम्मेदारी ली थी। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन कई आरोपी अब भी फरार हैं। इसके बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप लगाया गया। अदालत को बताया गया कि पहले उन्हें दो सहायक उपनिरीक्षक दिए गए थे, लेकिन एक महीने बाद एक को हटा लिया गया और अब केवल दिन के समय एक सहायक उपनिरीक्षक की सुरक्षा ही उपलब्ध है।

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