नई तकनीक और लॉजिस्टिक्स सुधार पर गडकरी का जोर, अमेरिकी कंपनियों संग संयुक्त उपक्रम की वकालत

नई दिल्ली, 22 मई 2026। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारतीय कंपनियों से नई प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था है और वैश्विक तकनीकी सहयोग से देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे को नई गति मिल सकती है।

गुरुवार को आयोजित American Chamber of Commerce in India (एएमसीएचएएम) के वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां नई तकनीकों के विकास में अग्रणी हैं। ऐसे में भारतीय उद्योगों के लिए उनके साथ साझेदारी करना बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सड़क परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए अमेरिकी परामर्श कंपनियों की सेवाएं लेने की संभावनाएं भी तलाश रहा है।

गडकरी ने देश में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के तेजी से विस्तार के कारण भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने बताया कि आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु की छह महीने पहले जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो गई थी, जबकि अब यह एकल अंक में पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में लॉजिस्टिक्स लागत लगभग 12 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। भारत भी अब प्रतिस्पर्धी स्तर की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मंत्री ने मोटर वाहन उद्योग को देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि आने वाले पांच वर्षों में भारत का लक्ष्य दुनिया का नंबर-1 ऑटोमोबाइल उद्योग बनना है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र करीब चार लाख युवाओं को रोजगार देता है और केंद्र तथा राज्यों के लिए सबसे अधिक जीएसटी राजस्व उत्पन्न करता है।

गडकरी ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका का मोटर वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये का है और भारत भी तेजी से इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

उन्होंने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बताते हुए कहा कि भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये ईंधन आयात पर खर्च करता है। ऐसे में स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाना समय की आवश्यकता है।

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