नई दिल्ली, 19 जुलाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने की मांग पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सफदरजंग अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त हैं और फिलहाल उन्हें निजी अस्पताल भेजने की आवश्यकता नहीं है।
यह याचिका वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने दायर की थी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि उनके पति को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में बेहतर उपचार की अनुमति दी जाए। करीब सवा घंटे तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए सरकारी अस्पताल में इलाज जारी रखने का निर्णय बरकरार रखा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने “माय बॉडी, माय चॉइस” के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि वांगचुक की इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सफदरजंग अस्पताल में सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं और मरीज को किसी प्रकार की चिकित्सा संबंधी कमी नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों का उपचार भी सरकारी अस्पतालों में होता है, इसलिए केवल निजी अस्पताल में भर्ती कराने की मांग पर्याप्त आधार नहीं बनती।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती करना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक था। इस पर सरकार ने बताया कि लंबे समय तक उपवास रहने से डिहाइड्रेशन और कीटोसिस जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी जरूरी थी।
सरकार के अनुसार, वांगचुक को फिलहाल बिना चीनी वाले तरल पदार्थ और ओआरएस दिया जा रहा है। उन्होंने नसों के माध्यम से दवा या पोषक तत्व लेने से इनकार किया है, इसलिए उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपचार कर रही मेडिकल टीम के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।
सरकार ने अदालत को यह भरोसा भी दिलाया कि वांगचुक के परिवार और उनकी पत्नी को अस्पताल में उनसे मिलने की पूरी अनुमति है तथा उपचार पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है।
दूसरी ओर, गीतांजलि आंग्मो ने अदालत में कहा कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और उनका मानना है कि निजी अस्पताल में वांगचुक को बेहतर चिकित्सा और निगरानी मिल सकती है।
गौरतलब है कि 18 जुलाई को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनजर दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। तब से वह वहीं भर्ती हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन लंबे उपवास के कारण उन्हें विशेषज्ञों की निरंतर निगरानी में रखा गया है।