नई दिल्ली, 30 जून 2026: केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े मामलों में बड़ी राहत देते हुए माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है। पहले यह समयसीमा 30 जून 2026 निर्धारित की गई थी। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि विभिन्न हितधारकों की मांग और तकनीकी समस्याओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, जीएसटीएटी के ऑनलाइन पोर्टल पर अत्यधिक दबाव के कारण बड़ी संख्या में करदाताओं और कर सलाहकारों को अपील दाखिल करने में तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अपील की समयसीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है, ताकि कोई भी पात्र करदाता केवल तकनीकी कारणों से अपने अपील के अधिकार से वंचित न रह जाए।
हालांकि मंत्रालय ने करदाताओं को यह भी सलाह दी है कि वे अंतिम समय तक इंतजार न करें और निर्धारित अवधि के भीतर जल्द से जल्द अपनी अपील दाखिल कर दें, जिससे पोर्टल पर अनावश्यक दबाव से बचा जा सके।
सितंबर 2025 से शुरू हुआ था GSTAT का संचालन
माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) का संचालन सितंबर 2025 में शुरू हुआ था। इसके गठन से पहले जीएसटी से जुड़े विवादों का निपटारा उच्च न्यायालयों अथवा सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से किया जाता था, जिससे मामलों के निस्तारण में काफी समय लगता था।
जीएसटीएटी के गठन के बाद करदाताओं और कर विभाग के बीच उत्पन्न विवादों के त्वरित समाधान की व्यवस्था विकसित हुई है। सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और प्रभावी होगी।
देशभर में 32 पीठों की व्यवस्था
सरकार अब तक जीएसटीएटी की 31 राज्य पीठों तथा नई दिल्ली स्थित एक प्रधान पीठ को अधिसूचित कर चुकी है। मई 2024 में न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा को जीएसटीएटी की प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में विभिन्न अपीलीय प्राधिकरणों के समक्ष 4.80 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनके चरणबद्ध तरीके से जीएसटीएटी में स्थानांतरित होने की संभावना है। ऐसे में अपीलीय न्यायाधिकरण पर शुरुआती दौर में कार्यभार काफी अधिक रहने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने फैसले का किया स्वागत
कर विशेषज्ञों ने सरकार के इस निर्णय को व्यावहारिक और समयानुकूल बताया है।
एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि समयसीमा बढ़ाने से करदाताओं के अपील करने के अधिकार की रक्षा होगी और जीएसटीएटी के पूर्ण रूप से सुचारु संचालन तक उन्हें पर्याप्त राहत मिलेगी। उन्होंने करदाताओं को सलाह दी कि अतिरिक्त समय मिलने के बावजूद अंतिम तिथि तक प्रतीक्षा न करें।
वहीं केपीएमजी इंडिया के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख एवं साझेदार अभिषेक जैन का कहना है कि समयसीमा बढ़ने से करदाताओं और कर पेशेवरों को नए अपीलीय तंत्र के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिलेगा। इससे केवल समयसीमा समाप्त होने के कारण वास्तविक अपीलों के खारिज होने की आशंका भी कम होगी।
सरकार के इस फैसले से हजारों करदाताओं, उद्योगों और कर सलाहकारों को राहत मिलने की उम्मीद है, विशेषकर उन मामलों में जहां तकनीकी बाधाओं के कारण समय पर अपील दाखिल नहीं हो पा रही थी। GSTAT व्यवस्था के पूरी तरह सक्रिय होने के साथ जीएसटी विवादों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना भी जताई जा रही है।
