CJP संसद मार्च हिंसा: पथराव और तोड़फोड़ मामले में दिल्ली पुलिस की FIR, CCTV फुटेज से आरोपियों की तलाश

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का दावा है कि झड़प में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं।

नई दिल्ली, 21 जुलाई। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ के मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है।

पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा और आउटर सर्किल क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े, पथराव किया और कई पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया तथा जंतर-मंतर क्षेत्र में पुलिस के हेलमेट और जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरण भी छीन लिए। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सरकारी कार्य में बाधा और हिंसा से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

CJP संसद मार्च हिंसा: पथराव और तोड़फोड़ मामले में दिल्ली पुलिस की FIR, CCTV फुटेज से आरोपियों की तलाश

दिल्ली पुलिस का दावा है कि झड़पों में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एडीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारी तथा कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। वहीं विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है।

घटना के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। नई दिल्ली, मध्य, उत्तर, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व जिलों सहित संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। प्रमुख सरकारी भवनों, संसद क्षेत्र और संभावित प्रदर्शन स्थलों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, वाहनों की सघन जांच और लगातार गश्त की जा रही है।

पुलिस ने कहा है कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों और विपक्षी दलों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए अनुमति नहीं थी और लागू निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके कारण स्थिति तनावपूर्ण हुई। मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और घटना की जांच जारी है।

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