मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की राज्य कर विभाग की समीक्षा, बोले- राजस्व वृद्धि के साथ विश्वास आधारित प्रशासन पर हो फोकस

लखनऊ, 25 मई 2026 (यूएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य कर विभाग को निर्देश दिए हैं कि कर संग्रह बढ़ाने के साथ ईमानदार व्यापारियों को सुविधा, सम्मान और त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में राज्य कर विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विभाग को राजस्व वृद्धि के साथ विश्वास आधारित प्रशासन का मॉडल प्रस्तुत करना होगा।

मुख्यमंत्री सोमवार को राज्य कर विभाग के शासन, मुख्यालय और फील्ड स्तर के अधिकारियों के साथ विशेष समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिले, अपील निस्तारण और रिफंड प्रक्रियाओं को अधिक सरल, डिजिटल और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी समाप्त होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने, छोटे कारोबारियों को जागरूक करने तथा जिला और खंड स्तर तक करदाता सहायता कार्यक्रम संचालित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर कर चोरी रोकने के साथ वैध व्यापार को प्रोत्साहित किया जाए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने जीएसटी और वैट मद में कुल 1,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया, जो पुनरीक्षित अनुमान का 98.8 प्रतिशत है। जीएसटी संग्रह के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र पहले और कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहे।

अधिकारियों के अनुसार, जीएसटी बकाया के रूप में 2658 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 228 प्रतिशत अधिक है। वहीं वैट बकाया के रूप में 800 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई, जो गत वर्ष से 29 प्रतिशत अधिक रही। प्रवर्तन इकाइयों के माध्यम से 2071 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग को 1,98,071 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया है। इसमें जीएसटी का लक्ष्य 1,49,956 करोड़ रुपये और वैट का लक्ष्य 48,115 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। अप्रैल माह में राज्य ने 10,896 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.6 प्रतिशत अधिक रहा।

अप्रैल में गौतमबुद्ध नगर जोन ने 1506 करोड़ रुपये के संग्रह के साथ 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। वहीं सहारनपुर जोन में 35.1 प्रतिशत तथा वाराणसी प्रथम जोन में 33.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मुरादाबाद जोन ने भी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ने फर्जी फर्मों और कर चोरी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि बोगस फर्मों के खिलाफ 477 मामलों में एफआईआर दर्ज की गईं और 168 गिरफ्तारियां की गईं। सात नवंबर 2025 को एसआईटी का गठन किया गया था। अब तक 180 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक की गई है तथा न्यायनिर्णयन कार्रवाई से 2250 करोड़ रुपये की मांग सृजित हुई है।

अपील निस्तारण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025-26 में जीएसटी की 52,432 और वैट की 11,365, कुल 63,797 अपीलों का निस्तारण किया गया। वर्तमान में जीएसटी की 18,504 तथा वैट की 2,193, कुल 20,697 अपीलें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने सभी लंबित अपीलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि 21.82 लाख सक्रिय करदाताओं के साथ उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक जीएसटी करदाता वाला राज्य बन गया है। प्रदेश में जीएसटी पंजीकरण आवेदनों के निस्तारण की औसत अवधि आठ दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 14 दिन है।

रिटर्न दाखिले की स्थिति में भी प्रदेश राष्ट्रीय औसत से आगे है। देय तिथि तक 90 प्रतिशत से अधिक करदाता रिटर्न दाखिल कर रहे हैं, जबकि प्रदेश में औसत मासिक रिटर्न दाखिला प्रतिशत 93 और केंद्र स्तर पर 91 प्रतिशत है। जीएसटी रिफंड मामलों के निस्तारण की औसत अवधि प्रदेश में 27 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 48 दिन है। मुख्यमंत्री ने रिफंड व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं त्वरित बनाने के निर्देश दिए ताकि व्यापारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित न हो।

तकनीक आधारित कर प्रशासन के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि 16 पैरामीटर निर्धारित कर 1.59 लाख वार्षिक रिटर्नों में मिसमैच डेटा पर विधिक कार्रवाई की जा रही है। एकीकृत नोटिस जारी करने के लिए नया मॉड्यूल विकसित किया गया है। वर्ष 2025-26 में 1.33 लाख डीलरों की स्क्रूटनी के दौरान 2369 करोड़ रुपये की मांग सृजित की गई और 345 करोड़ रुपये जमा कराए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा आधारित निगरानी और एआई आधारित विश्लेषण से कर प्रशासन की दक्षता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। उन्होंने बताया कि 75 जनपदों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग और जीएसटी 2.0 सुधारों पर चर्चा हुई। जून से राज्य कर विभाग द्वारा खंड स्तर पर संवाद कार्यक्रम शुरू करने की कार्ययोजना भी तैयार की गई है।

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