गुवाहाटी, 4 मई 2026। असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) स्पष्ट बहुमत के पार पहुंचता दिख रहा है। 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए करीब 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल 28 सीटों पर आगे चल रहे हैं। इन रुझानों से राज्य में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं।
हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में मजबूत वापसी
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपनी पारंपरिक जालुकबारी सीट से बढ़त बनाए हुए हैं, जो उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस के प्रमुख नेता गौरव गोगोई जोरहाट सीट से आगे चल रहे हैं। भाजपा इस चुनाव में अपने सहयोगी असम गण परिषद (AGP) और यूपीपीएल (UPPL) के साथ मिलकर मैदान में उतरी है और सत्ता में वापसी की हैट्रिक लगाने की ओर अग्रसर दिख रही है।
रिकॉर्ड मतदान और अहम मुद्दे
इस बार असम में 85.96% का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। चुनाव में बांग्लादेशी घुसपैठ, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), बेरोजगारी, ब्रह्मपुत्र की बाढ़ और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। इसके अलावा 2023 में हुए परिसीमन ने भी कई सीटों के राजनीतिक समीकरण बदल दिए, जिसका लाभ भाजपा को मिलता दिख रहा है।
विवादों का नहीं पड़ा असर
चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री सरमा और उनके परिवार को लेकर उठे संपत्ति और पासपोर्ट विवाद भी चर्चा में रहे। कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को सरमा ने सिरे से खारिज करते हुए इसे “विदेशी साजिश” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिसके खिलाफ उनकी पत्नी ने एफआईआर भी दर्ज कराई। हालांकि, चुनावी रुझानों में इस विवाद का कोई नकारात्मक असर नहीं दिख रहा है, बल्कि भाजपा को इसका राजनीतिक फायदा मिलता नजर आ रहा है।
गठबंधनों की सीधी टक्कर
एनडीए के मुकाबले कांग्रेस ने रायजोर दल और असम जातीय परिषद (AJP) के साथ गठबंधन किया है। वहीं एआईयूडीएफ (AIUDF) इस बार अकेले मैदान में है, जिससे कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी है। दिसपुर, बिहपुरिया और शिबसागर जैसी सीटों पर मुकाबला खासा दिलचस्प माना जा रहा है।
संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर
धुबड़ी और गोआलपाड़ा जैसे सीमावर्ती जिले इस चुनाव में सबसे संवेदनशील माने गए, जहां घुसपैठ और पहचान के मुद्दे प्रमुख रहे। इन क्षेत्रों के नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
शुरुआती रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा असम में अपनी पकड़ और मजबूत करने जा रही है। यदि ये रुझान अंतिम नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह भाजपा की ऐतिहासिक हैट्रिक होगी और पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में उसका वर्चस्व और मजबूत हो जाएगा।
