नई दिल्ली, 06 जून (यूएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देश की आर्थिक विकास दर को बनाए रखने, अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई।
अधिकारियों के अनुसार, बैठक ऐसे समय आयोजित की गई जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, महंगाई के दबाव और कमजोर मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इन परिस्थितियों में भारत की विकास गति को निरंतर बनाए रखने और व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।
पश्चिम एशिया संकट, आर्थिक वृद्धि, निवेश और कारोबार सुगमता पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों ने वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती, निवेश आकर्षण और विकास क्षमता पर अपने विचार साझा किए। परिषद के सदस्यों ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों तथा दीर्घकालिक आर्थिक रणनीतियों से जुड़े सुझाव भी प्रस्तुत किए।
बैठक के दौरान आम नागरिकों के जीवन को अधिक सरल बनाने और कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुधारों की समीक्षा की गई। शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने, अनुपालन संबंधी बोझ कम करने तथा निवेश और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का एक प्रमुख विषय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके संभावित आर्थिक प्रभाव रहे। परिषद के सदस्यों ने ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार मार्गों, आपूर्ति शृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बने रहने से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ना स्वाभाविक है।
चर्चा के दौरान भारत की आर्थिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान की है।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में देश के प्रमुख अर्थशास्त्री और नीति विशेषज्ञ शामिल हैं। परिषद सरकार को आर्थिक, सामाजिक और विकास संबंधी विषयों पर स्वतंत्र सुझाव प्रदान करती है तथा दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं, वैश्विक आर्थिक रुझानों और नीतिगत सुधारों पर मार्गदर्शन देती है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत को आर्थिक सुधारों, निवेश प्रोत्साहन, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में निरंतर प्रयास जारी रखने होंगे, ताकि देश की विकास यात्रा और अधिक गति प्राप्त कर सके।
