लखनऊ, 06 मई 2026। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। “बीसी सखी कार्यक्रम” इस दिशा में एक प्रभावशाली और दूरगामी पहल बनकर उभरा है, जो गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित यह योजना “एक ग्राम पंचायत–एक बीसी सखी” के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित कर उनके ही गांव में बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया जाता है। ये बीसी सखियाँ ग्रामीणों को उनके घर के पास ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं, जिससे बैंक शाखाओं तक जाने की जरूरत कम हो गई है।
इस कार्यक्रम ने न केवल महिलाओं को रोजगार दिया है, बल्कि उन्हें डिजिटल और वित्तीय रूप से भी सशक्त बनाया है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 40 हजार बीसी सखियाँ सक्रिय हैं, जो गांव-गांव जाकर सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया जा चुका है।
बीसी सखियाँ नकद जमा-निकासी, आधार आधारित भुगतान, बैलेंस जांच, बीमा, पेंशन और ऋण पुनर्भुगतान जैसी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इससे खासकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आया है, जहां पहले बैंकिंग सुविधाएं सीमित थीं।
यह योजना महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है। सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य और लखनऊ की अनीता पाल जैसी महिलाएं प्रतिमाह औसतन 45 हजार रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। अब तक बीसी सखियों द्वारा 121 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया जा चुका है।
इस पहल में भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक साझेदार के रूप में जुड़े हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
सरकार बीसी सखियों को माइक्रो एटीएम, लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे डिजिटल उपकरणों से सशक्त बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। साथ ही उन्हें जन सुविधा केंद्र संचालन, बीमा सेवाएं, आरडी खाता खोलना, ऋण वितरण-वसूली और डाकघर योजनाओं से जोड़ने की योजना है। भविष्य में आधार अपडेट जैसे कार्यों में भी उनकी भूमिका बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
दीपा रंजन ने बताया कि लक्ष्य है कि जल्द ही सभी ग्राम पंचायतों में बीसी सखी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि “आत्मनिर्भर ग्रामीण महिला–आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” का संकल्प साकार हो सके।
