अलीगंज अग्निकांड: एलडीए कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, बिल्डिंग मालिक बोले- अवैध निर्माण खुद गिराएंगे

लखनऊ, 09 जुलाई। अलीगंज अग्निकांड से जुड़े भवन निर्माण अनियमितता मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की विहित प्राधिकारी अदालत ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब एक-दो दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विवादित भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी या फिर शमन मानचित्र (कंपाउंडिंग) के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सुनवाई के दौरान भवन स्वामी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में कहा कि भवन में यदि कोई अवैध निर्माण है तो उसे भवन मालिक अपने खर्च पर स्वयं हटाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र स्वीकृत किया जाए।

भवन स्वामी का दावा- कमर्शियल गतिविधियां किराएदार चला रहे थे, एलडीए ने बताया तीसरी मंजिल पूरी तरह अवैध

भवन मालिक की ओर से यह भी दलील दी गई कि भवन में संचालित व्यावसायिक गतिविधियां किराएदारों द्वारा चलाई जा रही थीं और इसमें भवन स्वामी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। अधिवक्ताओं ने एलडीए की ओर से जारी नोटिस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भवन का कितना हिस्सा अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है।

इस पर एलडीए की ओर से मौजूद जूनियर इंजीनियर (जेई) ने अदालत को बताया कि भवन का केवल बेसमेंट और दो मंजिल का नक्शा स्वीकृत था, जबकि तीसरी मंजिल पूरी तरह अवैध रूप से बनाई गई। उन्होंने यह भी बताया कि स्वीकृत मानचित्र के अनुसार 20 वर्गमीटर बेसमेंट की अनुमति थी, लेकिन मौके पर लगभग 134 वर्गमीटर का बेसमेंट निर्मित पाया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विहित प्राधिकारी ने आदेश सुरक्षित रख लिया। अब आने वाले दिनों में यह तय होगा कि भवन को ध्वस्त करने का आदेश दिया जाएगा या शमन मानचित्र के आधार पर नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यह मामला 22 जून को अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड से जुड़ा है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए की जांच में भवन निर्माण से संबंधित कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके आधार पर भवन स्वामी को नोटिस जारी किया गया था।

मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की पड़ताल में भी लगातार नई लापरवाहियां सामने आ रही हैं। जांच में पाया गया कि जहां भवन में फायर एग्जिट और लोहे की आपातकालीन सीढ़ियां होनी चाहिए थीं, वहां लिफ्ट स्थापित कर दी गई थी। इसके अलावा स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली लोड का उपयोग और मानचित्र के विपरीत अतिरिक्त निर्माण भी जांच में सामने आया है।

एलडीए पहले ही भवन निर्माणकर्ताओं पर 91.25 लाख रुपये का दंड तथा 50 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगा चुका है। वहीं, भवन निर्माण और स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े 18 इंजीनियरों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी एसआईटी की जांच के दायरे में है।

अब इस बहुचर्चित मामले में एलडीए कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार रखती है तो यह अग्निकांड के बाद इस प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होगी।

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