यूपी में लगातार सातवें साल नहीं बढ़ीं बिजली दरें, 3.80 करोड़ उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

लखनऊ, 02 जुलाई। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा करते हुए प्रदेश के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। आयोग ने राज्य की सभी बिजली वितरण कंपनियों की दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश लगातार सातवें वर्ष बिजली दरें स्थिर रखने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

यूपीईआरसी के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह द्वारा जारी टैरिफ आदेश का उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के लगभग 3.80 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला बताया है। परिषद का कहना है कि उसके विधिक और तथ्यात्मक पक्षों के आधार पर बिजली कंपनियों की दर बढ़ाने की मांग को आयोग ने स्वीकार नहीं किया।

बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए 1,18,742 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) आयोग के समक्ष प्रस्तुत की थी। समीक्षा के बाद आयोग ने विभिन्न मदों में कटौती करते हुए इसे 1,13,785 करोड़ रुपये निर्धारित किया। वहीं, सब्सिडी को छोड़कर अनुमानित राजस्व 90,805 करोड़ रुपये तय किया गया है। राज्य सरकार की सब्सिडी शामिल होने पर वितरण कंपनियों को मौजूदा टैरिफ के आधार पर लगभग 1,11,205 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।

आयोग ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैटरी स्वैपिंग स्टेशन तथा बैटरी चार्जिंग एवं सर्विस चार्जिंग स्टेशनों के लिए सिंगल पार्ट टैरिफ लागू किया है। साथ ही सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच बैटरी चार्जिंग पर 20 प्रतिशत की छूट देने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी 17,100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20,400 करोड़ रुपये कर दी है। इसके अलावा पावर कॉरपोरेशन द्वारा प्रस्तावित 13.71 प्रतिशत वितरण हानि को घटाकर आयोग ने 12.91 प्रतिशत निर्धारित किया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि बिजली कंपनियां स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़े 3,838 करोड़ रुपये के खर्च का भार उपभोक्ताओं पर डालना चाहती थीं, लेकिन आयोग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि पावर कॉरपोरेशन यह प्रमाणित नहीं कर सका कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने से वितरण कंपनियों को वास्तविक वित्तीय लाभ कितना हुआ है।

नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) द्वारा अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को मिलने वाली 10 प्रतिशत रियायत समाप्त करने के प्रस्ताव को भी आयोग ने अस्वीकार कर दिया। आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी यह छूट जारी रखने का निर्णय लिया है।

आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए औसत विद्युत आपूर्ति लागत 7.96 रुपये प्रति यूनिट तथा औसत बिलिंग दर 7.78 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने वाला है और भविष्य में भी बिजली दरों में किसी भी अनुचित वृद्धि का कानूनी एवं तथ्यात्मक आधार पर विरोध किया जाएगा।

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