बंगाल में यूसीसी लागू करने की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बोले- कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा क्रियान्वयन

बंगाल में यूसीसी लागू करने की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बोले- कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा क्रियान्वयन

कोलकाता, 27 जून। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लागू करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात और असम की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी विधायी और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

उत्तर कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में साहित्यकार एवं ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती के अवसर पर आयोजित सरकारी कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू करने की एक निर्धारित प्रक्रिया है और राज्य सरकार उसी का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा सरकार आगामी सोमवार को विधानसभा के चालू बजट सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता विधेयक पेश कर सकती है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर गुरुवार शाम कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में चर्चा के बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया। यदि ऐसा होता है तो यह सरकार द्वारा चुनाव के समय घोषित छह महीने की समयसीमा से पहले ही एक बड़ा कदम होगा।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में सत्ता में आने के छह माह के भीतर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। इस संकल्प को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुखता से दोहराया था। पार्टी का कहना है कि समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानून सुनिश्चित करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश होता है तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति और सामाजिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना भी जताई जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घोषणा की कि राज्य सरकार ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय स्थापित करेगी, जहां इस ऐतिहासिक रचना और उससे जुड़े दस्तावेजों एवं विरासत को संरक्षित किया जाएगा।

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