पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली, 25 जून। पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इस सरकारी बयान ने एक नयी बहस को जन्म दिया और कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्रालय (एमईए) के अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट विदेश यात्रा के दौरान भारतीय नागरिक की राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, लेकिन यह स्वयं में नागरिकता का दस्तावेज नहीं है।

अधिकारियों ने बताया कि पासपोर्ट केवल विस्तृत सत्यापन और कई सरकारी एजेंसियों की जांच-पड़ताल के बाद ही जारी किया जाता है। फिर भी उन्होंने जोर दिया कि इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना और विदेशों में पहचान स्थापित करना है।

यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब नागरिकता साबित करने के लिए किन दस्तावेजों पर भरोसा किया जा सकता है, इस पर सार्वजनिक बहस जारी है। हाल के वर्षों में कई अदालतों ने निर्णय दिया है कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और अन्य रिकॉर्ड अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।

एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया कि जन्म से सभी भारतीय नागरिकों को कोई एक सार्वभौमिक नागरिकता दस्तावेज जारी नहीं किया जाता। नागरिकता के दावे अक्सर रिकॉर्ड और नागरिकता अधिनियम के कानूनी प्रावधानों के संयोजन से तय किए जाते हैं। विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों ने राजनीतिक आलोचना भी उत्पन्न की।

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता, तो पासपोर्ट जारी करने से पहले की जाने वाली पुलिस जांच का महत्व क्या रह जाएगा।

सरकार ने हालांकि यह बनाए रखा कि पासपोर्ट एक सुरक्षित और कठोर रूप से सत्यापित यात्रा दस्तावेज है। अधिकारियों ने चिप-आधारित ई-पासपोर्ट की शुरुआत और देशभर में पासपोर्ट सेवाओं के आधुनिकीकरण के प्रयासों को भी रेखांकित किया।

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