शिक्षक सर्वोपरि के मंत्र के साथ शिक्षा सुधारों को नई गति दे रही योगी सरकार

लखनऊ, 23 जून 2026 (यूएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों की इसी श्रृंखला में अब परिषदीय विद्यालयों के संचालन, छात्र नामांकन, अधिगम स्तर सुधार, शिक्षक सशक्तीकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।

हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी

मंगलवार को अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी तथा डायट मेंटर्स से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने आगामी शैक्षणिक सत्र की प्राथमिकताओं और शिक्षा विभाग की नई रणनीतियों की जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब प्रदेश के परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण बार-बार अवकाश बढ़ाने की स्थिति से बचने और बच्चों को पर्याप्त शिक्षण दिवस उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय लिया गया है। विद्यालय खुलने पर बच्चों का आत्मीय स्वागत करने और उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन का केंद्र कक्षा-कक्ष है और शिक्षक उसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन की सभी योजनाओं की सफलता अंततः शिक्षक की प्रतिबद्धता और उसके शिक्षण कार्य पर निर्भर करती है। इसलिए शिक्षा सुधारों की पूरी प्रक्रिया में शिक्षक सर्वोपरि हैं।

उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले ‘स्कूल चलो अभियान’ के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान और उनके नामांकन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं के जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं की मदद से ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी जो अभी तक विद्यालयी शिक्षा से नहीं जुड़ पाए हैं। साथ ही कक्षा 5 से कक्षा 6 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश को सुनिश्चित कर ड्रॉपआउट दर कम करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

अधिगम स्तर सुधारने के लिए निपुण भारत मिशन का दायरा अब कक्षा 5 तक विस्तारित किया जा रहा है। भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन विषयों के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। आगामी 6 जुलाई को आयोजित होने वाली निपुण संकल्प कार्यशाला में अकादमिक और प्रशासनिक तंत्र मिलकर निपुण जनपद बनाने का संकल्प लेगा।

उन्होंने विद्यालयों में पुस्तकालय संस्कृति को मजबूत बनाने, प्रिंट समृद्ध शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने तथा अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट को अधिक प्रभावी बनाते हुए वर्ष में दो बार अभिभावकों के साथ साझा करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ जैसे पठन अभियान को भी विद्यालयों में प्रोत्साहित किया जाएगा।

शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के कल्याण पर चर्चा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील की।

मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत उन्होंने जानकारी दी कि नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों तथा 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर होगी और शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शिक्षकों से निरंतर अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि एक अच्छा शिक्षक वही होता है जो स्वयं भी लगातार सीखता रहे। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए कहा कि सतत अध्ययन ही बेहतर शिक्षण और व्यक्तित्व विकास का आधार है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की निष्ठा, प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की सहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल स्थापित करेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।

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