अयोध्या, 21 जून 2026। राम मंदिर के चढ़ावे और दान सामग्री में कथित हेरफेर के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब यह मामला केवल दान राशि की कथित चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर को दान में मिली चांदी की ईंटों, अखंड ज्योति के दीपक, कलश और अन्य बहुमूल्य सामग्री के हिसाब-किताब को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दूसरी ओर, मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के बयानों में सामने आए विरोधाभासों ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार राम मंदिर को दान में मिली 60 किलो चांदी की विशेष ईंटें, चांदी के दीपक, कलश और अन्य सामग्री कहां हैं। इसी बीच उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग से जांच कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका भी दाखिल कर दी गई है।
ट्रस्ट के बयानों में सामने आया विरोधाभास
चढ़ावा प्रकरण के उजागर होने के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शुरुआती दौर में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया था। आठ जून को जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि ट्रस्ट समय-समय पर ऑडिट कराता है और किसी भी प्रकार की उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
इसके विपरीत राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बाद में कई सार्वजनिक बयानों में चढ़ावे में गड़बड़ी और चोरी की आशंका को स्वीकार किया। उन्होंने यहां तक कहा कि कर्मचारियों द्वारा नकदी की गड्डियां अलग रखने के प्रमाण मिले हैं और इसे “डाका” जैसी गंभीर घटना बताया। इन परस्पर विरोधी बयानों से यह धारणा मजबूत हुई है कि प्रारंभिक स्तर पर मामले को दबाने या कम करके दिखाने का प्रयास किया गया।
60 किलो चांदी की ईंटों का मामला बना नया सवाल
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के उत्तर भारत प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने दावा किया है कि देशभर के सराफा कारोबारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी का योगदान देकर लगभग 60 किलो चांदी एकत्र की थी। इस चांदी को गलाकर एक से सवा किलो वजन की विशेष ईंटें तैयार कराई गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र अंकित थे।
रस्तोगी के अनुसार 20 जुलाई 2020 को चंपत राय की सहमति के बाद ये चांदी की ईंटें अयोध्या स्थित रामकचहरी में सौंपी गई थीं। उस समय चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और तत्कालीन कैशियर प्रकाश गुप्ता भी मौजूद थे। दान सामग्री प्राप्त करने के बाद रसीद और शुद्धता प्रमाणपत्र भी जारी किया गया था। दानदाताओं की इच्छा थी कि इन ईंटों का उपयोग राम मंदिर की नींव पूजन में किया जाए, लेकिन बाद में इनके संबंध में कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई।
अखंड ज्योति का दीपक और कलश भी लापता होने का दावा
अनुराग रस्तोगी ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से एक-एक किलो वजन के दो चांदी के दीपक, दो चांदी के कटोरे, 200 ग्राम की पंचधातु की सिल्ली तथा नाग-नागिन का जोड़ा दान किया था।
उनके अनुसार एक दीपक में डॉ. अनिल मिश्र और उनकी पत्नी ने अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की थी, जिसकी तस्वीरें प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान सार्वजनिक हुई थीं। लेकिन मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद न तो वह दीपक दिखाई दे रहा है और न ही भोग के लिए दिए गए चांदी के कटोरे। इसी प्रकार ऋषिकेश की एक संस्था द्वारा दान किया गया एक किलो चांदी का कलश भी सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। रस्तोगी ने सभी दान सामग्रियों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
ट्रस्ट ने पहले बताया था 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना मिला
कुछ माह पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्वयं जानकारी दी थी कि राम मंदिर को दान स्वरूप लगभग 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया था कि इनमें से पहले चरण में 9.44 क्विंटल अर्थात 944 किलो चांदी भारत सरकार की टकसाल को जांच और गलाने के लिए भेजी गई थी।
जांच में चांदी की शुद्धता 95 प्रतिशत पाई गई थी। ट्रस्ट के अनुसार इस चांदी को ईंटों के रूप में तैयार कर बैंक में सुरक्षित रखा गया है। हालांकि अब दानदाताओं और विभिन्न संगठनों की ओर से यह मांग उठ रही है कि मंदिर को प्राप्त सभी सोना-चांदी, आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।
एसआईटी जांच के बीच न्यायिक आयोग की मांग
चढ़ावे में कथित हेरफेर की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपना काम कर रही है। इसी बीच अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दाखिल कर उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है। याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, अयोध्या जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और ट्रस्ट सचिव को पक्षकार बनाया गया है।
उधर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पहले से एसआईटी कर रही है, इसलिए उसकी रिपोर्ट आने तक किसी अलग कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।
प्रबंधन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर एक “मिनी सिटी” की तरह विकसित हो चुका है, जहां लगभग 1500 लोग विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहे हैं।
उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कार्य विभाजन और जवाबदेही स्पष्ट नहीं है। मंदिर के संचालन के लिए अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति, स्पष्ट जिम्मेदारियां, निर्धारित नियम और व्यवस्थित वेतन प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
ध्वजारोहण समारोह पर भी टिकी निगाहें
राम जन्मभूमि परिसर स्थित शेषावतार मंदिर में 23 जून को प्रस्तावित ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के शामिल होने की संभावना है तथा छह हजार से अधिक श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया है।
हालांकि चढ़ावा प्रकरण की जांच के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस कार्यक्रम में मंच साझा करते हैं या नहीं। इसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि अयोध्या से जुड़े मामलों का सच सामने आने पर कई बड़े दावे बेनकाब होंगे। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग दोहराते हुए प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण अब केवल आर्थिक अनियमितताओं की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। दान में मिली बहुमूल्य सामग्री, चांदी की ईंटों, सोना-चांदी के भंडार, प्रशासनिक जवाबदेही और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों ने इसे देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
