लखनऊ, 17 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में लघु पशुपालन क्षेत्र को संगठित, वैज्ञानिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पहली बार आयोजित दो दिवसीय ‘यू.पी. स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026’ का शुभारंभ प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह तथा राज्यमंत्री कृष्णा पासवान ने किया। कॉन्क्लेव का उद्देश्य भेड़, बकरी और सूकर पालन को रोजगार, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार गोवंश संरक्षण के साथ-साथ लघु पशुधन क्षेत्र के विकास को भी प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक पशुधन संपन्न राज्य है और यहां भेड़, बकरी तथा सूकर पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में यह कॉन्क्लेव किसानों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों और निवेशकों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, विपणन और उद्यमिता के नए अवसरों पर चर्चा होगी।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार लघु पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करा रही है। बकरी पालन योजना के तहत 60 हजार रुपये की इकाई लागत पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 1,786 इकाइयों की स्थापना की गई, जबकि वर्ष 2026-27 में 1,896 नई इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार भेड़ पालन योजना के तहत 1.70 लाख रुपये की लागत वाली इकाइयों पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है तथा आगामी वर्ष के लिए 225 इकाइयों का लक्ष्य तय किया गया है। सूकर पालन योजना में भी 1.47 लाख रुपये से अधिक लागत वाली इकाइयों पर 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत आधारभूत संरचना और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण पशुधन आधारित उद्योगों में निवेश का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने उद्यमियों से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
राज्यमंत्री कृष्णा पासवान ने कहा कि भेड़, बकरी और सूकर पालन ग्रामीण महिलाओं, छोटे किसानों और युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। कम लागत में अधिक आय देने वाले इन व्यवसायों से ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत हो रही है और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि यह कॉन्क्लेव ज्ञान, तकनीक और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। उन्होंने कहा कि पशुधन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देकर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
कॉन्क्लेव के दौरान पशुपालन विभाग ने जीएफएसटी (GFST) और द गोट ट्रस्ट के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए। इससे आधुनिक तकनीक, उन्नत नस्लों, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों ने ‘ग्रामीण समृद्धि में लघु पशुपालन की भूमिका’, ‘पोषण सुरक्षा’, ‘स्टार्टअप और निवेश के अवसर’ तथा ‘तकनीकी नवाचार’ जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
20वीं पशुगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में लगभग 1.45 करोड़ बकरियां, 9.85 लाख भेड़ें और 4.09 लाख सूकर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर बाजार व्यवस्था का लाभ पशुपालकों तक पहुंचाया जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है। इसी उद्देश्य से आयोजित यह कॉन्क्लेव प्रदेश में लघु पशुधन विकास की नई दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
