ग्राम प्रधानों के हाथों में ही रह सकती है गांवों की कमान, चुनाव टले तो प्रशासक बन सकते हैं मौजूदा प्रधान

लखनऊ, 24 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर बड़ा प्रशासनिक संकेत सामने आया है। माना जा रहा है कि इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो पाएंगे। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने पर विचार कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है तो पंचायत चुनाव होने तक गांवों की “बागडोर” प्रधानों के ही हाथों में बनी रह सकती है।

प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। सामान्य स्थिति में कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों के अधिकार समाप्त हो जाते हैं और ग्राम पंचायतों का संचालन एडीओ पंचायत या ग्राम पंचायत अधिकारी जैसे प्रशासनिक अधिकारियों के जरिए किया जाता है। लेकिन इस बार सरकार पुराने सिस्टम में बदलाव की तैयारी में दिखाई दे रही है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने से गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी। सड़क, पेयजल, सफाई, आवास और अन्य सरकारी योजनाओं का संचालन बिना बाधा जारी रखा जा सकेगा। पंचायत स्तर पर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था कारगर मानी जा रही है।

सरकारी हलकों में यह भी चर्चा है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले भी ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी जा चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार भी अब इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है।

यदि सरकार यह निर्णय लागू करती है तो प्रदेश के 57 हजार से अधिक ग्राम प्रधानों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां भी मौजूदा नेतृत्व के जरिए संचालित होती रहेंगी। इस संभावना को लेकर प्रधान संगठनों और ग्रामीण प्रतिनिधियों में उत्साह का माहौल है।

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