मायावती से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेताओं की बढ़ीं मुश्किलें, पार्टी ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

लखनऊ, 20 मई 2026 (यूएनएस)। मायावती के लखनऊ स्थित आवास पर मंगलवार शाम कांग्रेस नेताओं के बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम और बिना आधिकारिक अनुमति के पहुंचने का मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने संबंधित नेताओं से स्पष्टीकरण मांगते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ ही घंटे पहले अखिलेश यादव ने संकेत दिया था कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा।

मायावती के आवास पहुंचे नेताओं में कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और विभाग की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं सांसद तनुज पुनिया शामिल थे। हालांकि प्रतिनिधिमंडल की मायावती से मुलाकात नहीं हो सकी।

तनुज पुनिया ने बुधवार को कहा कि यह केवल शिष्टाचार मुलाकात का प्रयास था। उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम लखनऊ में अनुसूचित जाति विभाग की बैठक आयोजित की गई थी और बैठक समाप्त होने के बाद मायावती का आवास पास होने के कारण प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात करने का विचार किया। पुनिया ने यह भी स्पष्ट किया कि वे राहुल गांधी का कोई संदेश लेकर नहीं पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि इस मुलाकात को लेकर जो खबरें चलाई जा रही हैं, वे सही नहीं हैं और वह स्वयं राहुल गांधी के कार्यक्रम में रायबरेली में मौजूद हैं।

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि पार्टी ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कांग्रेस का अधिकृत प्रतिनिधिमंडल नहीं था और संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पांडे ने कहा कि कांग्रेस मायावती का सम्मान करती है, लेकिन आवास पर पहुंचे नेता अपनी व्यक्तिगत हैसियत से गए थे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा कि पार्टी ने इस दौरे की कोई अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीतिक मुलाकातें शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही तय की जाती हैं।

वहीं, विश्वनाथ पाल ने कहा कि उन्हें कांग्रेस नेताओं के मायावती के आवास पहुंचने की कोई जानकारी नहीं है।

गौरतलब है कि मंगलवार को ही अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम में कहा था कि समाजवादी पार्टी का अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन भविष्य के चुनावों में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा था कि गठबंधन में सीटों से ज्यादा महत्व जीत का होता है और यही फार्मूला आगे भी अपनाया जाएगा।

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