इस्लामाबाद में फिर हो सकती है अमेरिका-ईरान वार्ता, ट्रंप बोले- तेहरान के जवाब का इंतजार

तेहरान/वॉशिंगटन, 09 मई। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच रिश्तों में नरमी लाने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच अगले सप्ताह इस्लामाबाद में नई वार्ता हो सकती है। माना जा रहा है कि यह बातचीत पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश मध्यस्थ देशों की मदद से एक प्रारंभिक समझौता मसौदे पर काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह मसौदा आगे चलकर एक महीने तक चलने वाली औपचारिक वार्ता की नींव बन सकता है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी गहरे मतभेद बने हुए हैं।

अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने 14 बिंदुओं वाला प्रस्तावित मसौदा रखा है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने और उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश भेजने जैसे मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन बिंदुओं पर सहमति बनने से क्षेत्रीय सैन्य तनाव कम किया जा सकता है और संघर्षविराम को लंबा करने की संभावना बढ़ सकती है।

ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि उन्हें जल्द ही तेहरान की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी प्रशासन इस संभावित वार्ता को खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण मान रहा है।

हालांकि बातचीत की संभावनाओं के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच 30 दिन तक संघर्ष रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने के प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम फिलहाल सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

इस बीच ईरान की सत्ता व्यवस्था को लेकर भी नई जानकारी सामने आई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार मुज्तबा खामेनेई मौजूदा हालात में अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वह युद्ध रणनीति तय करने के साथ-साथ अमेरिका के साथ संभावित बातचीत को भी संभाल रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक युद्ध की शुरुआत में हुए एक बड़े हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे और उसी दौरान मुज्तबा खामेनेई भी घायल हुए थे। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से वह फिलहाल किसी गुप्त स्थान पर रह रहे हैं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से दूर हैं।

हाल ही में मसूद पजेश्कियन ने खुलासा किया कि उन्होंने मुज्तबा खामेनेई के साथ करीब ढाई घंटे लंबी बैठक की थी। इसे युद्ध के बाद किसी वरिष्ठ ईरानी नेता की पहली सार्वजनिक मुलाकात माना जा रहा है। इसके बाद संकेत मिले हैं कि ईरान की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था धीरे-धीरे फिर सक्रिय हो रही है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि यह बातचीत पश्चिम एशिया के भविष्य और वैश्विक राजनीति दोनों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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