चुनाव प्रक्रिया पर शक करने वालों को ‘स्पष्ट संदेश’: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा का बयान

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतगणना के दौरान केंद्रीय कर्मियों की तैनाती को लेकर चल रहे विवाद पर Supreme Court of India ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इस निर्णय को भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता के पक्ष में “स्पष्ट संदेश” बताया है। पार्टी के नेता अमित मालवीय ने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए उत्तर है, जो चुनावी प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।

पूरा प्रकरण

तृणमूल कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की तैनाती का प्रावधान किया गया था। पार्टी ने पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

शनिवार को उच्चतम न्यायालय की विशेष पीठ—न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची—ने कहा कि इस प्रकरण में किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को मतगणना कर्मियों के चयन का पूर्ण अधिकार है और 13 अप्रैल का उसका आदेश अनुचित नहीं कहा जा सकता।

भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय ने सामाजिक माध्यम X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और कानूनी आघात है। उन्होंने कहा कि न्यायालय का यह रुख दर्शाता है कि मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न करने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

निर्वाचन आयोग का पक्ष

भारत निर्वाचन आयोग ने न्यायालय को अवगत कराया कि उसके निर्देशों के अनुसार मतगणना में केंद्रीय और राज्य सरकारी कर्मचारियों का संयुक्त रूप से उपयोग किया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका निराधार है तथा सभी नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया

इस निर्णय पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

चुनावी परिदृश्य

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में सम्पन्न हुआ था। मतगणना 4 मई को निर्धारित है। इससे पूर्व कलकत्ता उच्च न्यायालय भी यह स्पष्ट कर चुका है कि निर्वाचन आयोग का निर्णय विधिसम्मत है।

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