पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत ने खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने यह आदेश कुछ शर्तों के साथ पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना पड़ेगा। साथ ही, उन्हें साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और बिना अदालत की अनुमति के विदेश न जाने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने कहा कि अपराध शाखा थाने में दर्ज केस नंबर 04/2026 में अपीलकर्ता को अग्रिम जमानत दी जाती है और वह जांच अधिकारी द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधीनस्थ अदालत जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शर्तें भी लगा सकती है।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 24 अप्रैल के आदेश पर भी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियां उपलब्ध तथ्यों के समुचित आकलन पर आधारित नहीं थीं और आरोपी पर सबूत का बोझ डालना उचित नहीं था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 339 के तहत स्पष्ट अपराध का उल्लेख किए बिना, केवल महाधिवक्ता के बयान के आधार पर की गई टिप्पणियां उचित नहीं लगतीं।
यह मामला तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों के बाद खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी में आपराधिक मामला दर्ज कराया।
इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि, असम पुलिस ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश जारी कर ट्रांजिट जमानत पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने को कहा था।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है, जबकि मामले की जांच आगे जारी रहेगी।
