प्रदेश में ‘स्कूल चलो अभियान’ मिशन मोड में, 1 मई से विशेष ड्राइव

लखनऊ, 26 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि 6 से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और सभी का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित किया जाए।

1 मई से विशेष अभियान की शुरुआत
प्रदेशभर में 1 मई 2026 से विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत झुग्गी-झोपड़ियों, श्रमिक बस्तियों और ईंट-भट्ठों में रहने वाले बच्चों को चिन्हित कर स्कूलों से जोड़ा जाएगा। इस पहल का मुख्य फोकस आउट-ऑफ-स्कूल और ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा में लाना है।

बालिकाओं और दिव्यांग बच्चों पर विशेष ध्यान
अभियान में दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें स्पेशल एजुकेटर के सहयोग से नामांकित किया जाएगा। वहीं ड्रॉपआउट बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिलाया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने इसे जन आंदोलन बनाने की बात कही, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से बाहर न रहे।

प्रशासन को सख्त निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक पात्र बच्चे का नामांकन सुनिश्चित किया जाए और कोई भी बच्चा छूटने न पाए।

पहले चरण के बाद अब दूसरा चरण तेज
‘स्कूल चलो अभियान’ के पहले चरण (1–15 अप्रैल) में छोटे बच्चों के आंगनवाड़ी/बाल वाटिका में नामांकन और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान का काम शुरू किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में छूटे हुए बच्चों तक सीधी पहुंच बनाकर नामांकन प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।

100% ट्रांजिशन का लक्ष्य
सरकार ने कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100 प्रतिशत ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चे बीच में पढ़ाई न छोड़ें। साथ ही, आरटीई के तहत निजी स्कूलों में चयनित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस
विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत कार्य जारी हैं। साथ ही ‘विद्यांजलि पोर्टल’ के माध्यम से स्कूलों की जरूरतों का आकलन कर स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के सहयोग से सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल नामांकन बढ़ाएगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और मजबूत बनाएगा।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *