पहले शिक्षा उपेक्षित थी, अब ड्रॉपआउट दर में भारी कमी: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ/वाराणसी, 05 अप्रैल 2026। योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में शिक्षा सरकार के एजेंडे में नहीं थी, लेकिन अब हालात बदले हैं और छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी आई है।

वाराणसी में ‘स्कूल चलो अभियान’ के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही और नकल को बढ़ावा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि उस समय न तो गरीब बच्चों की शिक्षा की चिंता थी और न ही सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कक्षा तीन, चार, पांच और छह के बाद बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सड़कों, तालाबों और मोहल्लों में बच्चे दिनभर खेलते नजर आते थे। जब उनसे स्कूल न जाने का कारण पूछा जाता था, तो वे बताते थे कि स्कूल दूर है या वहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने इस समस्या का विश्लेषण किया, जिसमें पाया गया कि स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी प्रमुख कारण थी। इसके बाद व्यापक स्तर पर सुधार किए गए।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा परिषद के तहत अब लगभग सभी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों का परिणाम यह है कि स्कूल छोड़ने की दर 19 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 3 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से अपील की कि वे इस दर को शून्य तक लाने के लिए प्रयास करें।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर 80,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं और यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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