लखनऊ, 30 मार्च 2026, RNN- बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। लंबे समय तक सत्ता की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री के रूप में करीब 20 साल का कार्यकाल आज (30 मार्च) को समाप्त हो जाएगा । राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।
संवैधानिक नियमों के तहत संसद और राज्य विधानमंडल की दोहरी सदस्यता संभव नहीं है, इसलिए उनका इस्तीफा आवश्यक था। सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद वे औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा।
इस्तीफे के साथ ही बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अभी तक भारतीय जनता पार्टी या जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि इस बार मुख्यमंत्री पद भाजपा के हिस्से में जा सकता है, जबकि जदयू को डिप्टी सीएम पद मिल सकता है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। 2017 में भाजपा में शामिल होने के बाद से उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत हुई है और वे कुशवाहा समुदाय के बड़े चेहरे के रूप में उभरे हैं। वहीं, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी उपमुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंप दिया है। उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और सीट खाली घोषित की जाएगी।
राजनीतिक सफर: हार से शिखर तक
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1977 में पहला चुनाव हारने के बाद उन्होंने 1985 में जीत दर्ज की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1989 में वे सांसद बने और केंद्र में मंत्री पद भी संभाला।
2000 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, हालांकि यह कार्यकाल केवल सात दिनों का था। 2005 में उन्होंने NDA के साथ मिलकर सत्ता में वापसी की और इसके बाद कई बार मुख्यमंत्री बने। 2015 में महागठबंधन के साथ जीत, 2017 में फिर NDA में वापसी, 2022 में दोबारा महागठबंधन और 2024 में फिर NDA के साथ जुड़ना—उनकी राजनीति का यह सफर लगातार बदलावों से भरा रहा।
नवंबर 2025 में उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक नया रिकॉर्ड बनाया और बिहार के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्री बने।
नए युग की शुरुआत के संकेत
नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि पहली बार भाजपा राज्य में पूरी तरह नेतृत्व की भूमिका में नजर आ सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथों में जाती है और क्या यह बदलाव राज्य की राजनीति की दिशा भी बदल देगा।
