चीन ने भारत के नए राजदूत के रूप में विक्रम दुरईस्वामी का किया स्वागत, संबंधों में सुधार की जताई उम्मीद

चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी

बीजिंग, 20 मार्च । चीन ने भारत के नए राजदूत के रूप में वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी की नियुक्ति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में कहा कि राजनयिक देशों के बीच मैत्रीपूर्ण और सहयोगपूर्ण संबंधों को मजबूत करने में अहम सेतु का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन नए भारतीय राजदूत के आगमन का स्वागत करता है और उनके पदभार ग्रहण करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी विक्रम दुरईस्वामी वर्तमान में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त हैं और जल्द ही बीजिंग में अपना कार्यभार संभालेंगे। 56 वर्षीय दुरईस्वामी, चीन में मौजूदा भारतीय राजदूत प्रदीप कुमार रावत का स्थान लेंगे।

चीनी पक्ष ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि दुरईस्वामी ने अपना एक चीनी नाम “वेई जियामेंग” चुना है। चीनी विद्वानों के अनुसार, “वेई” एक प्रचलित उपनाम है, जबकि “जिया” का अर्थ शुभ या प्रशंसनीय और “मेंग” का अर्थ सहयोगी होता है। इस प्रकार इस नाम का व्यापक अर्थ “उत्कृष्ट सहयोगी” या “श्रेष्ठ साझेदारी बनाने वाला” माना जा रहा है, जो मौजूदा कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य में प्रतीकात्मक महत्व रखता है।

दुरईस्वामी को चीन मामलों का गहरा अनुभव प्राप्त है। अपने प्रारंभिक करियर में उन्होंने हांगकांग और बीजिंग में भारतीय मिशनों में कार्य किया। हांगकांग में तृतीय सचिव के रूप में रहते हुए उन्होंने चीनी भाषा (मंदारिन) का अध्ययन किया और बाद में बीजिंग में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

चीनी आधिकारिक मीडिया ने भी उनकी नियुक्ति को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रकाशन समूह के अखबार Global Times ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए उन्हें “अनुभवी चीन विशेषज्ञ” बताया है।

शंघाई स्थित फुदान विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र के उपनिदेशक लिन मिनवांग ने कहा कि चीन में भारतीय राजदूत का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और दुरईस्वामी का अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है। वहीं, त्सिंगहुआ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रणनीति संस्थान से जुड़े विशेषज्ञ कियान फेंग ने उन्हें भारत के वरिष्ठ “चीन विशेषज्ञ” राजनयिकों में से एक बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति बीजिंग के साथ संबंधों को लेकर नई दिल्ली के गंभीर दृष्टिकोण और व्यावहारिक कूटनीति का संकेत है।

गौरतलब है कि भारत-चीन संबंध अप्रैल 2020 में पूर्वी लद्दाख में शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि हाल के समय में दोनों देश संबंधों को स्थिर करने और सुधार की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में विक्रम दुरईस्वामी की नियुक्ति को दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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