राज्यसभा में सेवानिवृत्त सदस्यों को भावुक विदाई, दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सराहा योगदान

नयी दिल्ली, 18 मार्च : राज्यसभा में बुधवार को सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को भावुक विदाई दी गई। विभिन्न दलों के नेताओं ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर उनके योगदान और आपसी मित्रता को याद किया तथा विश्वास जताया कि वे आगे भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे।

डेरेक ओ’ब्रायन ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि सेवानिवृत्त सदस्य अब “नई भूमिकाओं” में सार्वजनिक जीवन में योगदान देंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई सदस्यों को अपने कार्यकाल के दौरान तीन सभापतियों—एम वेंकैया नायडू, जगदीप धनखड़ और वर्तमान में सी पी राधाकृष्णन—के साथ काम करने का अवसर मिला।

ओ’ब्रायन ने युवा सांसदों जैसे प्रियंका चतुर्वेदी, साकेत गोखले और रीताव्रता बनर्जी के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि सदन में अनुभव और युवा ऊर्जा का संतुलित समागम देखने को मिलता है।

द्रमुक के वरिष्ठ नेता तिरूची शिवा ने इस अवसर को “जीवन का एक मोड़” बताते हुए कहा कि विदाई कठिन होती है, लेकिन सेवानिवृत्त सदस्य आगे भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे। उन्होंने दिग्विजय सिंह, रजनी पाटिल, भुवनेश्वर कालिता और के टी एस तुलसी सहित कई नेताओं के योगदान की सराहना की।

संजय सिंह ने इस पल को “दुखद और भावनात्मक” बताते हुए संसदीय समितियों में बने व्यक्तिगत संबंधों को याद किया। उन्होंने उपसभापति हरिवंश के आचरण की सराहना करते हुए किसी भी अनजाने कठोर व्यवहार के लिए क्षमा भी मांगी।

बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने कहा कि ऐसे अवसर यह दर्शाते हैं कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य सार्वजनिक सेवा की भावना से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “शक्ति या विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सेवा ही इस सदन की पहचान है।”

विदाई के इस अवसर पर सदन में एक भावुक और सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला, जहां सभी दलों के सदस्यों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को प्रमुखता दी।

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