चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 13 IAS और 5 IPS अधिकारियों के तबादले

जिला स्तर पर चुनाव प्रबंधन मजबूत करने की तैयारी, डीएम-सह-डीईओ और डीआईजी स्तर पर नई तैनाती

कोलकाता, 18 मार्च :आगामी चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों का नया दौर शुरू किया है। आयोग ने 13 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम-सह-डीईओ) के रूप में नियुक्त किया है, जबकि 5 आईपीएस अधिकारियों को उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर तैनात किया गया है।

आयोग के आदेश के अनुसार, जिलाधिकारी के रूप में तैनात किए गए अधिकारी ही जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे, जिससे चुनाव प्रबंधन और निगरानी की कमान सीधे उनके हाथ में रहेगी।

नई नियुक्तियों में जितिन यादव (कूच बिहार), संदीप घोष (जलपाईगुड़ी), विवेक कुमार (उत्तर दिनाजपुर), राजनवीर सिंह कपूर (मालदा) और आर अर्जुन (मुर्शिदाबाद) को डीएम-सह-डीईओ बनाया गया है। इसके अलावा श्रीकांत पल्ली (नादिया), स्वेता अग्रवाल (पूर्वी बर्धमान), शिल्पा गोरिसरिया (उत्तर 24 परगना), अभिषेक कुमार तिवारी (दक्षिण 24 परगना), हरिशंकर पणिक्कर (दार्जिलिंग) और टी बालासुब्रमण्यम (अलीपुरद्वार) को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजधानी कोलकाता में स्मिता पांडे को नगर निगम की आयुक्त के साथ कोलकाता उत्तर की जिला निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है, जबकि रणधीर कुमार को कोलकाता दक्षिण का डीईओ नियुक्त किया गया है।

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये नियुक्तियां स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई हैं। अधिकारी जिला स्तर पर चुनाव तैयारियों की निगरानी के साथ-साथ पर्यवेक्षक की भूमिका भी निभाएंगे।

इसी के साथ जारी एक अन्य आदेश में आईपीएस अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं। राठौड़ अमितकुमार भरत को रायगंज रेंज, अजीत सिंह यादव को मुर्शिदाबाद, श्रीहरि पांडे को बर्धमान, कंकर प्रसाद बरुई को प्रेसीडेंसी रेंज और अंजलि सिंह को जलपाईगुड़ी रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है।

निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और अधिकारियों को 19 मार्च दोपहर 3 बजे तक कार्यभार ग्रहण कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।

गौरतलब है कि यह फेरबदल चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि आयोग राज्य में चुनावी तैयारियों को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

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