दुबई, 11 मार्च । पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने तेल समृद्ध खाड़ी क्षेत्र पर दबाव बढ़ाने के अपने अभियान को तेज करते हुए फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों, तेल सुविधाओं और दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार ईरान के दो ड्रोन दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास गिरे, जिसमें चार लोग घायल हो गए। हालांकि एमिरेट्स का मुख्यालय माने जाने वाले इस हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन सामान्य रूप से जारी रहा। दुबई मीडिया कार्यालय के मुताबिक हमले के बावजूद एयरपोर्ट की सेवाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ा।
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने पश्चिम एशिया में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की नई रणनीति की भी घोषणा की है। इससे विशेष रूप से दुबई, सऊदी अरब और बहरीन के लिए खतरा बढ़ गया है।
इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के तट के पास थाईलैंड के एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल गिरने से उसमें आग लग गई। थाईलैंड के समुद्री विभाग के अनुसार ओमान की नौसेना ने जहाज पर सवार 20 लोगों को बचा लिया है, जबकि चालक दल के तीन सदस्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत ने दावा किया कि उसके रक्षा तंत्र ने ईरान के आठ ड्रोन मार गिराए, जबकि सऊदी अरब ने शैबाह तेल क्षेत्र की ओर जा रहे पांच ड्रोन को नष्ट कर दिया। बताया जा रहा है कि ईरान ने इस संकरे जलमार्ग में माल ढुलाई को लगभग पूरी तरह रोक दिया है, जबकि इसी मार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है।
इससे पहले अमेरिका ने दावा किया था कि उसने बारूदी सुरंग बिछाने वाले ईरान के 16 जहाज नष्ट कर दिए हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा विस्फोटक लगाए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर ईरान के अर्धसैनिक संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने चेतावनी दी है कि अगले आदेश तक वह इस क्षेत्र से शत्रु पक्ष और उसके सहयोगियों को “एक लीटर” भी तेल निर्यात नहीं होने देगा।
संघर्ष के 11वें दिन में प्रवेश करने के साथ दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण हमले करने की चेतावनी दोहराई है।
इसी बीच लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में इजराइल की ओर से किए गए कई हमलों में सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें रेड क्रॉस का एक सदस्य भी शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 480 से अधिक और इजराइल में 12 लोगों की जान गई है। बढ़ते संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
