शराब नीति केस: नई दिल्ली की अदालत ने सीबीआई को ‘साउथ ग्रुप’ शब्द पर लगाई फटकार, अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपमुक्त

नई दिल्ली | 27 फरवरी राजनीतिक रूप से संवेदनशील आबकारी नीति मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में नई दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित 22 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने साथ ही जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा आरोपियों के एक समूह के लिए “साउथ ग्रुप” शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसे भाषा के चयन में संयम बरतने की चेतावनी दी।

मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि “साउथ ग्रुप” जैसी शब्दावली का कानून में कोई आधार नहीं है और यह किसी विधिक रूप से मान्य वर्गीकरण के अनुरूप नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक दायित्व का निर्धारण केवल साक्ष्यों और वैधानिक प्रावधानों के आधार पर होना चाहिए, न कि क्षेत्रीय पहचान जैसे कारकों पर।

अदालत की मुख्य टिप्पणियां

अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा आरोपियों के एक समूह का वर्णन उनके क्षेत्रीय मूल या निवास स्थान के आधार पर करना अनुचित है, खासकर तब जब अन्य आरोपियों के लिए कोई समान क्षेत्रीय वर्गीकरण प्रयुक्त नहीं किया गया। न्यायालय के अनुसार, “नार्थ ग्रुप” या किसी अन्य तुलनीय श्रेणी का उल्लेख न होना इस वर्गीकरण को मनमाना बनाता है।

अदालत ने यह भी कहा कि क्षेत्र-आधारित नामकरण से पूर्वाग्रह की धारणा उत्पन्न हो सकती है और यह संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के सिद्धांत के विपरीत है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे शब्द न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, साक्ष्य से ध्यान भटका सकते हैं और अभियोजन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा सकते हैं।

जांच एजेंसी को निर्देश

न्यायाधीश ने सीबीआई को भविष्य में आरोपपत्र और जांच दस्तावेज तैयार करते समय अधिक सावधानी, सतर्कता और निष्पक्ष भाषा का उपयोग करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों का वर्णन पूरी तरह साक्ष्य-आधारित होना चाहिए और उसमें विभाजनकारी या अपमानजनक अर्थ वाले शब्दों से परहेज किया जाना चाहिए।

मामले का महत्व

यह आदेश न केवल आबकारी नीति मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है, बल्कि जांच एजेंसियों द्वारा प्रयुक्त भाषा और वर्गीकरण के मानकों पर भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। अदालत ने संकेत दिया कि आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्षता केवल निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच और अभियोजन की भाषा में भी परिलक्षित होनी चाहिए।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *