नई दिल्ली, 26 फरवरी। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर असहमति को अपराध की तरह पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब सत्ता स्वयं को राष्ट्र समझने लगे, तब लोकतंत्र कमजोर हो जाता है। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, न कि उत्तर कोरिया, और यहां शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आत्मा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने बयान में कहा कि वर्तमान समय में देश में असहमति जताने वालों को दमन का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने पर लाठीचार्ज, मुकदमे और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं, किसानों, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों के आंदोलनों को गंभीरता से सुनने के बजाय दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों से परेशान युवाओं ने जब अपने भविष्य को लेकर आवाज उठाई, तो उन्हें कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इसी तरह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग को भी उचित महत्व नहीं दिया गया। राहुल गांधी के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर समाप्त करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार होती है। उनके मुताबिक, जब सरकार आलोचना से बचने लगे और असहमति को देशविरोधी ठहराया जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में किसानों, आदिवासियों और पर्यावरण से जुड़े आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करना किसी भी नागरिक का वैधानिक अधिकार है और इसे राष्ट्र-विरोधी गतिविधि के रूप में देखना लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है।
