उत्तर प्रदेश पुलिस में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम: दबाव में व्यवहार सुधार और जनता के साथ बेहतर संवाद पर जोर

लखनऊ, तीन फरवरी । उत्तर प्रदेश पुलिस ने पुलिसकर्मियों को दबावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन और जनता के साथ प्रभावी संवाद के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह तीन-दिवसीय कार्यक्रम ‘सक्षम पुलिसिंग’ नाम से पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान समविश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में राज्य के लगभग चार लाख पुलिसकर्मियों में से 40 चुनिंदा अधिकारियों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को व्यक्तिगत और पेशेवर कौशल में उन्नति, व्यवहार में सुधार और जनता के साथ सकारात्मक संवाद के लिए तैयार करना है।

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने कहा कि प्रशिक्षण केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि रवैये और व्यवहार को भी आकार देता है। उन्होंने कहा, “प्रभावी मौखिक और गैर-मौखिक संचार क्षमता खासतौर से अहम है क्योंकि जनता के साथ संवाद का तरीका सीधे तौर पर पुलिस की छवि को आकार देता है।”

टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान समविश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बद्री नारायण तिवारी ने बताया कि पुलिसकर्मियों के लिए भावनात्मक लचीलापन और सामाजिक संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण उन्हें संतुलन, सहानुभूति और पेशेवर प्रभावशीलता विकसित करने में मदद करेगा।

पुलिस प्रशिक्षण महानिदेशक राजीव सभरवाल ने कहा कि यह पहल समकालीन पुलिसिंग की मांगों के अनुरूप पुलिसकर्मियों की क्षमता बढ़ाने और जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का केंद्र व्यवहार, बातचीत के तरीके और पेशेवर काबिलियत है।

इस पहल से अधिकारियों का मानना है कि जमीनी स्तर पर पुलिस का व्यवहार सुधरेगा, जनता का विश्वास बढ़ेगा और पुलिस बल की सामग्री और मानसिक क्षमता में सुधार होगा।

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