करुणा के बिना कानून अत्याचार, कानून के बिना करुणा अराजकता का कारण बनती है: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

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पणजी | 25 जनवरी – प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना करुणा अराजकता को जन्म देती है। उन्होंने यह टिप्पणी नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ गोवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चलाए गए 30 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान के समापन समारोह को संबोधित करते हुए की।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग केवल एक आपराधिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय समस्या भी है। उन्होंने जोर दिया कि इससे निपटने के लिए प्रतिशोधात्मक बयानबाजी नहीं, बल्कि परामर्श और संवेदनशील कार्रवाई की आवश्यकता है। उनके अनुसार, महीने भर चला यह अभियान इसी दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से सामने लाने में सफल रहा।

उन्होंने विधि व्यवस्था और सामाजिक परिवर्तन के बीच गहरे अंतर्संबंध की ओर इशारा करते हुए कहा कि पिछले चार दशकों में उन्होंने न्याय व्यवस्था के विकास को देखा है, जहां यह समझ विकसित हुई है कि करुणा और कानून एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा, “करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना करुणा अराजकता पैदा करती है।”

प्रधान न्यायाधीश ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इसके तहत विद्यार्थियों से संवाद सम्मानजनक तरीके से किया गया, बिना उन्हें नीचा दिखाए। यह अभियान लोगों में भय उत्पन्न किए बिना जागरूकता फैलाने में सफल रहा। कार्यक्रम में नशे से उबर चुके युवाओं पर आधारित एक वीडियो का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन लोगों को आवाज मिली, जिन्हें अक्सर समाज खारिज कर देता है।

उन्होंने कहा कि नशे की लत शोर या चेतावनी के साथ नहीं आती, बल्कि यह चुपचाप घरों, कक्षाओं और समुदायों में प्रवेश कर संभावनाओं से भरे भविष्य को खोखला कर देती है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग न केवल व्यक्तियों को, बल्कि पूरे समाज को नुकसान पहुंचाता है।

गोवा के संदर्भ में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राज्य की आत्मा केवल इमारतों या गली-मोहल्लों में नहीं, बल्कि हर नागरिक और निवासी में समाहित है। उन्होंने कहा कि गोवा का अर्थ संरक्षण, विरासत और अपनी पहचान पर गर्व से जुड़ा हुआ है।

कला अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह के अलावा बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर भी उपस्थित थे।

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