लखनऊ, 23 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने और गौ-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘गोधन समागम-2026’ में प्रदेश के 112 उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया गया। धर्मपाल सिंह, कैबिनेट मंत्री (पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनैतिक पेंशन विभाग) ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में 63 दुग्ध उत्पादकों को ‘गोकुल पुरस्कार’ तथा 49 दुग्ध उत्पादकों को ‘नंदबाबा पुरस्कार’ प्रदान किए। सभी विजेताओं को प्रतीक चिह्न, प्रमाण-पत्र और नगद राशि देकर सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गोधन समागम प्रदेश की गव्य परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का जीवंत संगम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, स्वरोजगार सृजन तथा गौवंश संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में स्वदेशी नस्ल की गायों के संवर्धन और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं।
गोकुल पुरस्कार के अंतर्गत लखीमपुर-खीरी निवासी वरूण सिंह को 1,81,272 लीटर दुग्ध आपूर्ति के लिए राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि आगरा जनपद के वीरेन्द्र सिंह को 1,10,693.50 लीटर दुग्ध आपूर्ति के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। दोनों विजेताओं को क्रमशः 2 लाख रुपये और 1.50 लाख रुपये की धनराशि दी गई। अन्य चयनित लाभार्थियों को जनपद स्तरीय पुरस्कार के तहत 51 हजार रुपये प्रदान किए गए। नंदबाबा पुरस्कार के अंतर्गत रामपुर जनपद के अरुण कुमार को राज्य स्तरीय सम्मान के साथ 51 हजार रुपये की राशि दी गई, जबकि अन्य लाभार्थियों को 21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

कार्यक्रम में निराश्रित गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले हरदोई, अलीगढ़, अमरोहा, जालौन और रायबरेली जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि पुरस्कृत 112 दुग्ध उत्पादकों में 25 महिलाएं शामिल हैं, जो दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती हैं।
सरकार की ‘दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022’ के अंतर्गत प्रदेश में 550 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे प्रतिदिन 39 लाख लीटर दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि हुई और लगभग 1500 रोजगार सृजित हुए। नीति के तहत 35 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, अधिकतम 5 करोड़ रुपये की सीमा तक प्रदान किया जा रहा है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी योजनाओं के विस्तार हेतु विशेष बजट प्रावधान किया गया है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड तथा राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के विशेषज्ञों ने गौ-आधारित अर्थव्यवस्था, पशु पोषण, नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य पर जानकारी साझा की। समागम में लगभग एक हजार किसान प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि वेबकास्ट के माध्यम से लाखों लोगों ने कार्यक्रम से जुड़कर लाभ उठाया।
