समितियों को सशक्त किए बिना लोकतंत्र अधूरा: सतीश महाना

लखनऊ/जयपुर, 05 मई 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र को प्रभावी और जवाबदेह बनाने में विधानसभा समितियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समितियों को सशक्त किए बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था अधूरी मानी जाएगी।

महाना राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की द्वितीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। यह समिति लोकसभा द्वारा गठित की गई है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि समितियां लोकतंत्र में “मिनी सदन” के रूप में कार्य करती हैं, जहां किसी भी विषय पर गहराई से चर्चा और सूक्ष्म परीक्षण संभव होता है। इससे न केवल सदन का समय बचता है, बल्कि निर्णय अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बनते हैं।

महाना ने कहा कि अधिकारियों की समितियों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना ही सुशासन की असली कसौटी है। यदि समितियों की सिफारिशों को समयबद्ध और गंभीरता से लागू किया जाए, तो शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है।

बैठक की अध्यक्षता नरेंद्र सिंह तोमर कर रहे थे। इस दौरान महाना ने सुझाव दिया कि महत्वपूर्ण विधेयकों को अनिवार्य रूप से समितियों के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि उनकी गहन समीक्षा सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि समिति प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञों की भागीदारी, आधुनिक तकनीक का उपयोग, नियमित प्रशिक्षण और पारदर्शिता को बढ़ावा देना जरूरी है। इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं अधिक उत्तरदायी और जनकेन्द्रित बनेंगी।

बैठक में समिति प्रणाली की प्रभावशीलता बढ़ाने और संसदीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक से पहले सदस्यों ने राजस्थान विधानसभा भवन और संग्रहालय का अवलोकन भी किया।

इस अवसर पर वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया।

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