पानी की हर बूंद बचाने को जनआंदोलन बनाएं, प्रदेश में न हो पेयजल संकट : योगी

लखनऊ, 21 जून 2026 (यूएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान करते हुए कहा है कि मौसम की अनिश्चितता और मानसून की अनियमितता को देखते हुए प्रत्येक नागरिक को जल संचयन और जल संरक्षण के प्रयासों से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जानी चाहिए और वर्षाजल संचयन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़कर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

मौसम की स्थिति, मानसून की प्रगति, पेयजल आपूर्ति और भूजल संरक्षण से संबंधित कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। जलापूर्ति व्यवस्था निर्बाध और सुचारु बनी रहे तथा नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कम वर्षा की संभावना को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अग्रिम तैयारी करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों क्षेत्रों में जून से सितंबर तक सामान्य से कम वर्षा के संकेत मिले हैं। जून माह में भी अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम तथा अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने सिंचाई, पंचायती राज, भूगर्भ जल विभाग, नमामि गंगे, राजस्व और कृषि विभाग को समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर जनसहभागिता पर आधारित होने चाहिए। तालाबों और पोखरों में गांवों का गंदा पानी न जाने पाए, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाए। साथ ही अमृत सरोवरों के संरक्षण, स्वच्छता और नियमित रखरखाव पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।

योगी आदित्यनाथ ने वर्षाजल संचयन को मिशन मोड में आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि सभी सरकारी भवनों को जल संरक्षण के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में अपर मुख्य सचिव, भूगर्भ जल विभाग ने बताया कि प्रदेश में भूजल पुनर्भरण के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2013 में प्रदेश में अतिदोहित विकासखंडों की संख्या 113 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 44 रह गई है। वर्ष 2017 में अन्य स्रोतों से लगभग 30.59 लाख करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण होता था, जो 2025 में बढ़कर 35.79 लाख करोड़ लीटर हो गया। इसी अवधि में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 69.91 लाख करोड़ लीटर से बढ़कर 73.39 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।

अधिकारियों ने बताया कि सतत विकास लक्ष्य-6 के तहत भूजल दोहन की दर को 70 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश ने हासिल कर लिया है। वर्ष 2022 में यह दर 70.66 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 70 प्रतिशत रह गई। पिछले दस वर्षों में प्रदेश के 361 विकासखंडों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 29 जनपदों में औसत भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 172 विकासखंडों में प्रतिवर्ष 10 सेंटीमीटर से अधिक तथा 69 विकासखंडों में दस वर्षों के दौरान 20 सेंटीमीटर से अधिक सुधार दर्ज किया गया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना, इंडो-इजराइल बुंदेलखंड जल परियोजना, वर्षाजल संचयन थीम पार्क, भूजल सप्ताह, रूफटॉप वर्षाजल संचयन कार्यक्रम और भूजल निगरानी नेटवर्क जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भूजल संरक्षण को मजबूत किया जा रहा है। प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री को नदियों की सिल्ट सफाई कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया।

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