वर्क प्लान के अनुरूप निरंतर मॉनीटरिंग से ही तेज होगा औद्योगिक विकास: मुख्य सचिव एस.पी. गोयल

वर्क प्लान के अनुरूप निरंतर मॉनीटरिंग से ही तेज होगा औद्योगिक विकास: मुख्य सचिव एस.पी. गोयल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को तय समय-सीमा में धरातल पर उतारने के लिए वर्क प्लान के अनुरूप निरंतर और प्रभावी मॉनीटरिंग अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं में केवल उपलब्ध और विवाद-मुक्त भूमि का ही निवेशकों को आवंटन किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी अड़चन न आए और उत्पादन कार्य शीघ्र शुरू हो सके।

मुख्य सचिव गुरुवार को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें गंगा एक्सप्रेस-वे, उत्तर प्रदेश डिफेन्स इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी), बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडा), मेडिकल डिवाइस पार्क, गौतमबुद्ध नगर तथा फार्मा पार्क, ललितपुर की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ये सभी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनमें किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन निवेशकों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत भूमि आवंटित की जा चुकी है, उनके साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएं। इन बैठकों में संबंधित इकाइयों की संभावित फंक्शनल डेट और विस्तृत वर्क प्लान प्राप्त कर उसे विभागीय स्तर पर मॉनीटर किया जाए। साथ ही, निवेशकों से जुड़ी शेष औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराकर निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने पर विशेष जोर दिया गया।

गंगा एक्सप्रेस-वे की समीक्षा करते हुए गोयल ने शेष सभी कार्यों को 15 फरवरी 2025 से पहले पूर्ण कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत कुल 1497 स्ट्रक्चर—जिसमें मेजर ब्रिज, आरओबी, माइनर ब्रिज और फ्लाईओवर शामिल हैं—का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कैरिज-वे का निर्माण कुल 578.03 किलोमीटर में से 567.53 किलोमीटर तक पूरा हो चुका है और शेष कार्य 31 जनवरी से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इसी तरह, 730.850 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड में से 547.478 किलोमीटर का निर्माण पूर्ण हो चुका है और अर्थवर्क का कार्य समाप्त किया जा चुका है। सर्विस रोड, वे-साइड एमेनिटीज और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े शेष कार्य 15 फरवरी तक पूरे कर लिए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश डिफेन्स इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और बीडा की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि यूपीडीआईसी के लिए निर्धारित 5136.3128 हेक्टेयर भूमि के सापेक्ष अब तक 4304.7873 हेक्टेयर, यानी लगभग 83.8 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। कॉरिडोर के अंतर्गत 62 उद्योगों को भूमि आवंटित की जा चुकी है, जबकि 113 उद्योगों के लिए आवंटन प्रक्रिया प्रगति पर है। इनमें से 15 उद्योगों ने अपना सेटअप शुरू कर दिया है और 9 उद्योगों में उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है, जिसे औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडा) के संदर्भ में मुख्य सचिव ने बीडा महायोजना-2045 के अंतर्गत जोनल और सेक्टर प्लानिंग का कार्य 31 मार्च 2025 से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एक्टिवेशन एरिया में जलापूर्ति और विद्युत आपूर्ति से जुड़े कार्यों के लिए इसी माह वर्क ऑर्डर जारी करने तथा 60 मीटर चौड़ी आर्टिरियल रोड का निर्माण शीघ्र प्रारंभ करने को कहा, ताकि निवेशकों को बुनियादी सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जा सकें।

मेडिकल डिवाइस पार्क, गौतमबुद्ध नगर की समीक्षा में बताया गया कि कुल प्रस्तावित 350 एकड़ भूमि के सापेक्ष 300 एकड़ भूमि पहले से उपलब्ध है, जबकि शेष भूमि को आपसी सहमति के आधार पर आगामी तीन महीनों में अधिग्रहित कर लिया जाएगा। पार्क में कॉमन साइंटिफिक फैसिलिटीज का निर्माण पूरा हो चुका है और आवश्यक उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिससे यहां जल्द ही उत्पादन गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

फार्मा पार्क, ललितपुर परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है। पहले चरण के अंतर्गत पैकेज-1 में सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम, पावर और वाटर नेटवर्क, वेस्ट वॉटर कन्वेयंस सिस्टम, ट्रक पार्किंग, कंपाउंड वॉल और लैंडस्केपिंग सहित सोलर पैनल, प्रशासनिक भवन, फायर फाइटिंग भवन और एंट्रेंस गेट के निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। वर्तमान में साइट पर लगभग 29 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य निर्धारित समय-सारणी के अनुसार पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पैकेज के तहत सभी कार्य 26 सितंबर 2026 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने दोहराया कि इन सभी परियोजनाओं की सफलता उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की पंक्ति में खड़ा करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए और निरंतर मॉनीटरिंग के माध्यम से प्रत्येक परियोजना को तय लक्ष्य तक पहुंचाया जाए।

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