लखनऊ, 24 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिस्सा लिया और प्रदेश में कृषि क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राज्य में “लैब टू लैंड” की अवधारणा अब जमीन पर उतर चुकी है, जिससे वैज्ञानिक तकनीकों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज कृषि उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। यह बदलाव केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों, वैज्ञानिक शोध और एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित योजनाओं का परिणाम है। उन्होंने बताया कि अब केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों को जानकारी, संसाधन और बाजार—तीनों उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि पहले ये केंद्र निष्क्रिय थे, लेकिन अब इन्हें सशक्त किया गया है। वर्तमान में ये केंद्र किसानों के खेतों तक पहुंचकर नई तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं और नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इस बदलाव का स्पष्ट संकेत है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में आज लगभग 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल और 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। तिलहन उत्पादन भी 48 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि कृषि को वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जाए, जिससे किसानों की आय में और वृद्धि हो सके।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बाराबंकी के प्रगतिशील किसान रामशरण वर्मा का उल्लेख किया, जो सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीकों से बेहतर उत्पादन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे किसान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अब प्रदेश में किसान साल में एक की बजाय दो से तीन फसलें ले रहे हैं। बेहतर सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और सड़कों के कारण खेती का माहौल अनुकूल हुआ है। उन्होंने बताया कि कई जिलों में किसान मक्का जैसी फसलों से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट और आगरा में प्रस्तावित इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर जैसे संस्थान कृषि क्षेत्र को नई दिशा देंगे। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए किसानों को बेहतर बाजार भी मिलेगा।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान भी उपस्थित रहे। यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में नई रणनीति बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
