मंत्रिमंडल का संकल्प: ‘सेवा तीर्थ’ बनेगा सशक्तीकरण का केंद्र, ‘नागरिक देवो भव’ से प्रेरित होगा हर निर्णय

नई दिल्ली, 24 फरवरी । नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में अपनी पहली बैठक कर यह संकल्प लिया कि यहां लिया गया हर निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा और यह परिसर शक्ति प्रदर्शन का नहीं, बल्कि हर भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र बनेगा।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘सेवा संकल्प प्रस्ताव’ की जानकारी देते हुए कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित शासन का हर प्रयास देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल और सुलभ बनाने के उद्देश्य से जुड़ा रहेगा। प्रस्ताव के अनुसार, नए परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय 140 करोड़ नागरिकों के प्रति सेवा-भाव और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से प्रेरित होगा।

प्रस्ताव में कहा गया है कि शासन व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिकों की संवेदनाओं के प्रति सजग बनाना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। मंत्रिमंडल ने दोहराया कि यहां निर्मित कार्य-संस्कृति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर नीति नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी रहेगी।

मंत्री वैष्णव ने बताया कि यह परिसर उस ऐतिहासिक स्थल पर बना है, जहां ब्रिटिश काल में अस्थायी बैरक हुआ करते थे। आजादी के बाद दशकों तक सरकारों ने साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय से शासन संचालन किया, जिसने विरासत को संभालते हुए भविष्य के भारत की नींव रखी। उन्होंने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ उसी विकास यात्रा की आधुनिक अभिव्यक्ति है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत की पहचान भौतिक प्रगति और मानवीय मूल्यों के संतुलन से रही है, और ‘सेवा तीर्थ’ इसी समन्वित दृष्टि का प्रतीक है। मंत्रिमंडल ने माना कि संवैधानिक मूल्य शासन को नागरिकों की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ते हैं, और नई कार्य-संस्कृति इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित होगी।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि बीते वर्षों में शासन की दूरदर्शी नीतियों और सुधारों ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है तथा जनता के विश्वास को मजबूत किया है। प्रस्ताव के अनुसार, नई ऊर्जा और सुधारों की गति के साथ भारत को विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा।

मंत्रिमंडल ने ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति पुनः प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि आज लिए जा रहे निर्णय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देंगे। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक आधुनिक प्रशासनिक परिसर नहीं, बल्कि शासन की नई सोच, नई गति और नई कार्य-संस्कृति का प्रतीक है।

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