लखनऊ, 25 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच रामदास आठवले ने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है, अन्यथा अकेले चुनाव लड़ने से भी पीछे नहीं हटेगी।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटी है। उन्होंने बताया कि एनडीए की सहयोगी होने के नाते पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन इसके लिए 25 सीटों की मांग रखी गई है।
आठवले ने स्पष्ट कहा कि अगर उनकी यह मांग पूरी नहीं होती है, तो आरपीआई (ए) स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पार्टी दलित, पिछड़े और वंचित समाज की आवाज को मजबूत करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रही है।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि इन दलों ने महिलाओं के हितों के खिलाफ काम किया और विधेयक का विरोध किया।
रामदास आठवले ने प्रदेश सरकार से मांग की कि दलित बहुल गांवों में समाज भवन बनाए जाएं और उनका संचालन स्थानीय लोगों को सौंपा जाए, ताकि वंचित वर्गों को सीधा लाभ मिल सके।
उन्होंने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 26 नवंबर को, जो भीमराव अंबेडकर से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है, लखनऊ के डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का लक्ष्य है।
बहुजन समाज पार्टी पर टिप्पणी करते हुए आठवले ने कहा कि वर्तमान में उसका प्रभाव कम हुआ है और लोकसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति पर काम कर रही है।
साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रुख स्पष्ट नहीं रहा और इससे प्रदेश की महिलाओं को नुकसान हुआ है।
