अलीगंज अग्निकांड की जांच का दायरा बढ़ा, एलडीए के पूर्व वीसी समेत कई अफसर जांच के घेरे में

लखनऊ, 28 जून 2026 (यूएनएस)। लखनऊ के चर्चित अलीगंज अग्निकांड मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। अब तक की जांच में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक पूर्व उपाध्यक्ष (वीसी) की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है। सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जा सकती है। इसके साथ ही संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में कई और वरिष्ठ अधिकारियों एवं अभियंताओं पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।

एसआईटी की कार्रवाई के बाद एलडीए में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे अधिकारियों और इंजीनियरों में बेचैनी बढ़ गई है। विभाग के कई अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनका तर्क है कि सीमित अवधि के लिए किसी क्षेत्र में तैनात रहे अधिकारियों को भी समान रूप से जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

2016 से 2026 तक तैनात रहे 100 से अधिक अधिकारियों-अभियंताओं की भूमिका खंगाल रही एसआईटी, कार्रवाई का दायरा और बढ़ने के संकेत

जांच एजेंसी ने वर्ष 2016 से 2026 के बीच अलीगंज क्षेत्र में तैनात रहे 100 से अधिक अधिकारियों, अभियंताओं और प्रवर्तन से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। इन अधिकारियों ने अलग-अलग समय पर संपत्ति प्रबंधन, मानचित्र स्वीकृति, प्रवर्तन और विहित प्राधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। एसआईटी अब उपलब्ध अभिलेखों, फाइलों और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर प्रत्येक अधिकारी की जवाबदेही तय करने में जुटी है।

सूत्रों के मुताबिक, एलडीए पहले ही छह वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज चुका है। इनमें अरविंद त्रिपाठी, वी.वी. मिश्रा, अरुण सिंह, संजय पांडेय, शिरीष वर्मा और डी.के. सिंह के नाम शामिल हैं। इन अधिकारियों पर अपने कार्यकाल के दौरान अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने और प्रशासनिक लापरवाही बरतने के आरोपों की जांच की जा रही है।

एलडीए ने इससे पहले 18 अभियंताओं और छह अधिकारियों की सूची भी एसआईटी को उपलब्ध कराई थी। अब इस सूची का दायरा बढ़ाकर 2016 से 2026 तक अलीगंज क्षेत्र में तैनात सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जा रहा है। यह सूची जल्द ही शासन और एसआईटी दोनों को सौंपी जाएगी।

जांच के दौरान एसआईटी ने एलडीए के वर्तमान उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और एक अपर सचिव को भी पूछताछ के लिए तलब किया। उनसे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई में हुई कथित लापरवाही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपाय तथा संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई। एलडीए ने संपत्ति आवंटन, भवन मानचित्र स्वीकृति, अवैध निर्माणों के विरुद्ध जारी ध्वस्तीकरण आदेश तथा अन्य प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी फाइलें भी जांच एजेंसी को सौंप दी हैं।

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी प्रत्येक स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने का प्रयास कर रही है। यदि जांच में लापरवाही या मिलीभगत के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो शासन स्तर पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

अलीगंज अग्निकांड के बाद राज्य सरकार ने अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। माना जा रहा है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है तथा कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है और एसआईटी दस्तावेजी साक्ष्यों, फाइलों तथा अधिकारियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

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