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राहुल गांधी के समर्थन पर अभिषेक बनर्जी ने जताया आभार, बोले- मैं केवल जनता के सामने झुकूंगा

कोलकाता, 31 मई 2026। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि वह केवल जनता के प्रति जवाबदेह हैं और किसी भी सत्ता के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी द्वारा जताई गई चिंता और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और उसके मूल्यों की रक्षा की लड़ाई में सभी लोकतांत्रिक शक्तियां एकजुट और दृढ़ हैं।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में पांच देशों की यात्रा कर भारत का प्रतिनिधित्व किया था और आतंकवाद के खिलाफ देश का पक्ष मजबूती से रखा था। उन्होंने दावा किया कि आज वह स्वयं राजनीतिक हिंसा और राज्य प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जो लोग भाजपा का समर्थन करते हैं उन्हें देशभक्त बताया जाता है, जबकि सवाल उठाने वालों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।

अभिषेक बनर्जी ने अपने संदेश में लिखा, “मैं अपने सिद्धांतों से समझौता कर आरामदायक जीवन जीने के बजाय लोकतंत्र की रक्षा करते हुए धमकियों और चुनौतियों का सामना करना पसंद करूंगा। सत्ता अस्थायी होती है, लेकिन जनता की इच्छा स्थायी होती है। मैं केवल जनता के सामने झुकूंगा, सत्ता में बैठे लोगों के सामने कभी नहीं।”

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने और देश को बांटने की कोशिश करने वाली ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। उनका मानना है कि अंततः भय, नफरत, हिंसा और धमकियों की राजनीति पर जनता की आवाज की जीत होगी।

गौरतलब है कि हाल ही में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राहुल गांधी ने उनसे संपर्क कर उनका हालचाल जाना था और समर्थन व्यक्त किया था। इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी का धन्यवाद करते हुए यह प्रतिक्रिया दी है।

इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतंत्र और राजनीतिक सहिष्णुता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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