अयोध्या की आड़ में देश की आस्था और अस्मिता पर प्रहार हो रहा है : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 14 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों के लिए राष्ट्र सर्वोपरि नहीं है, वे अयोध्या की आड़ में देश की आस्था और अस्मिता पर लगातार प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) निष्पक्ष जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कुछ लोग इस घटना की आड़ लेकर हिंदू आस्था और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री मंगलवार को आयोजित ‘ऊंचाइयों पर यूपी’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने नौ वर्षों से अधिक के कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था, निवेश, रोजगार, आर्थिक विकास और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों को रेखांकित किया।

राम मंदिर से जुड़े कथित घोटाले के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि नैतिक आधार पर संबंधित लोगों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दिया है। इसके बावजूद कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को आधार बनाकर देश की आस्था के साथ खिलवाड़ करने और हिंदू धार्मिक स्थलों पर प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यही वे लोग हैं जो पहले गरीबों के अधिकारों पर डाका डालते थे और हनुमानगढ़ी जैसे पवित्र स्थल पर नमाज पढ़वाने का प्रयास करते थे। उन्होंने जनता से ऐसी ताकतों के प्रति सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत पर किसी भी प्रकार का आघात स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश ने बीते नौ वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है। उन्होंने दावा किया कि कभी ‘बीमारू’ राज्य कहे जाने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में हर तीसरे दिन दंगे होते थे, महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था और बेटियां तथा व्यापारी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। उनके अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में अभिभावक बेटियों को सुरक्षा कारणों से राज्य के बाहर पढ़ने भेजने को मजबूर थे, जबकि व्यापारी और किसान भी भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की पहचान दंगा और कर्फ्यू वाले राज्य से बदलकर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा वाले राज्य के रूप में बनी है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में सुरक्षित वातावरण होने के कारण ही बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है। वर्ष 2018 में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के बाद अब तक प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लखनऊ की चिकनकारी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, मेरठ का खेल उद्योग, भदोही का कालीन और वाराणसी की साड़ी उद्योग जैसी पारंपरिक पहचान संकट में थी, लेकिन आज इन क्षेत्रों को नई ऊर्जा और बाजार उपलब्ध कराया गया है।

मुख्यमंत्री ने आर्थिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का वार्षिक बजट तीन लाख करोड़ रुपये से बढ़कर नौ लाख करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2016-17 में उत्तर प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 12 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर 1.20 लाख रुपये से अधिक हो गई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला कार्यबल की भागीदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, जबकि बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत से भी कम रह गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने अब तक नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.25 लाख से अधिक भर्तियां शामिल हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में केवल 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जबकि आज उनकी संख्या बढ़कर 45 हजार से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा और सुशासन के क्षेत्र में हुए ये बदलाव नए उत्तर प्रदेश की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

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