लखनऊ, 17 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा ‘स्किल हब’ बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए बुधवार को कौशल विकास मिशन मुख्यालय में ‘कौशल संवाद सम्मेलन’ का आयोजन किया। सम्मेलन में प्रदेशभर के इंडस्ट्री ट्रेनिंग पार्टनर्स, प्रशिक्षण प्रदाताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लेकर कौशल विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी, उद्योगोन्मुखी और रोजगारपरक बनाने पर मंथन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग डॉ. हरिओम तथा मिशन निदेशक पुलकित खरे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उद्योगों और कौशल विकास संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं को नई दिशा देना था।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास केवल प्रमाणपत्र वितरण तक सीमित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह युवाओं को रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ने का व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को अपनी मानव संसाधन आवश्यकताओं की स्पष्ट पहचान कर जिला स्तर पर प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करनी चाहिए, ताकि प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी कम हो सके।
उन्होंने उद्योग प्रशिक्षण साझेदारों की संख्या बढ़ाने, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप कार्यक्रमों को व्यापक बनाने तथा स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। डॉ. हरिओम ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमिता की ओर भी प्रेरित करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभाग बैंकिंग सहायता, मार्गदर्शन और हैंडहोल्डिंग के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि कौशल विकास मिशन की सफलता सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में उद्योग प्रशिक्षण साझेदारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में अभी भी अधिक उद्योगों को प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को केवल प्रशिक्षित कार्यबल की मांग करने के बजाय प्रशिक्षण व्यवस्था में प्रत्यक्ष भागीदारी निभानी होगी, जिससे उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
सम्मेलन में प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, अप्रेंटिसशिप को मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहन देने तथा कौशल विकास कार्यक्रमों में नवाचार को शामिल करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा करते हुए प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए, ताकि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में आसानी हो और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
कौशल संवाद सम्मेलन को उत्तर प्रदेश में कौशल विकास की नई रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी कौशल विकास मॉडल के रूप में स्थापित करना है।
