ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी संगठन ने सौंपा ज्ञापन, कार्यभार और ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था पर जताई नाराज़गी

तिलहर–शाहजहांपुर। ग्राम पंचायत अधिकारी संघ और ग्राम विकास अधिकारी संगठन के प्रतिनिधियों ने अपनी लंबे समय से लंबित समस्याओं को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन एडीओ (पंचायत) को सौंपा। ज्ञापन में ग्राम सचिवों—अर्थात ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी—द्वारा वर्तमान समय में झेली जा रहीं चुनौतियों को विस्तारपूर्वक दर्ज किया गया।

संगठन ने प्रमुख रूप से यह मुद्दा उठाया कि ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत सचिवों को अपने मूल विभागीय दायित्वों के अतिरिक्त कई अन्य विभागों के कार्य भी सौंप दिए गए हैं, जबकि उन्हें पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। इससे कार्यभार बढ़ने के साथ-साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं।

ज्ञापन में शासन आदेश संख्या 33-1-2025 दिनांक 03 नवम्बर 2025 के क्रम में लागू की गई ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को भी अव्यवहारिक बताते हुए इसका जोरदार विरोध किया गया। प्रतिनिधियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क व्यवस्था और डिजिटल संसाधनों की भारी कमी के बीच ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना अत्यंत कठिन है, लेकिन इसके बावजूद सचिवों पर इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का दबाव बढ़ रहा है।

संगठन ने कहा कि ग्राम सचिव ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं, क्योंकि पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग की लगभग सभी महत्त्वपूर्ण योजनाएँ इन्हीं के माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में बिना आवश्यक संसाधनों, तकनीकी सुविधाओं और व्यवहारिक व्यवस्था के काम करना धीरे–धीरे असंभव होता जा रहा है।

ज्ञापन में यह मांग भी शामिल रही कि ग्राम पंचायत कार्यालय में सचिव के रूप में जो दायित्व सौंपे गए हैं, उसी अनुरूप उपस्थिति प्रणाली लागू की जाए तथा सभी स्तरों पर समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि सचिवों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत अधिकारी संतोष बाबू, सर्वेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, टिंकू कुमार, सचिन सक्सेना तथा ग्राम विकास अधिकारी ओमपाल गंगवार और अशोक कुमार शामिल रहे।

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