दतिया में ‘एसआईआर’ में भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों की नियुक्ति, जिलाधिकारी ने स्वीकार की गलती

भोपाल, 24 नवंबर । मध्यप्रदेश के दतिया जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सोमवार को एक बड़ी त्रुटि सामने आई, जब भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कुछ लोगों को बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के सहयोगी के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया। इस मामले ने प्रशासनिक प्रक्रिया और राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर विवाद खड़ा कर दिया।

दतिया प्रशासन ने स्वीकार किया कि यह एक “गलती” थी और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को सहयोगी बनाने का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था। प्रशासन के अनुसार, एसआईआर के तहत हर बीएलओ को दो से तीन सहयोगी नियुक्त किए गए हैं, लेकिन गलती से कुछ ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल हो गए जो भाजपा और आरएसएस से जुड़े हुए थे।

मामला उस समय सार्वजनिक हुआ जब कांग्रेस के मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया जिले के कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की ओर से जारी सूची को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। उन्होंने दावा किया कि सूची में कम से कम चार लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं। पटवारी ने कहा, “निर्वाचन आयोग के बाद अब प्रशासन भी सत्ता और संगठन की कठपुतली बनकर काम कर रहा है। एसआईआर के नाम पर बीएलओ के सहयोगी बनाकर भाजपा के पदाधिकारियों की नियुक्ति लोकतंत्र का अपमान है।”

मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी
मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी

सूची में शामिल कुछ सहयोगियों ने स्वयं अपनी राजनीतिक संबद्धता स्वीकार की। उदाहरण के लिए, बॉबी राजा बुंदेला ने आरएसएस से जुड़े होने की बात स्वीकार की, जबकि मनीष मिश्रा ने बताया कि वह भाजयुमो (भारतीय जनता युवा मोर्चा) से जुड़े हुए थे। एक अन्य सहयोगी ने भी कहा कि वह भाजपा से जुड़ा हुआ था।

इस संबंध में जब दतिया जिलाधिकारी स्वप्निल जी. वानखड़े से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तीन लोगों के नामों की गलती थी। उन्होंने कहा, “आदेश मैंने जारी नहीं किया था। इसे दतिया विधानसभा के एसडीएम ने जारी किया था। उन्होंने अधिकारियों से सूची ली थी और उसमें तीन नाम गलती से आ गए। हमारा और अधिकारियों का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था।”

जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने एसडीएम को नोटिस जारी किया है और एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने यह भी कहा कि गलती सुधारते हुए इन लोगों को जल्द ही सूची से हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सहायक बनाने के लिए विभिन्न विभागों से नाम मांगे गए थे। इसमें तीन नाम गलती से शामिल हो गए। हमने प्रक्रिया की समीक्षा की है और दोषियों से जवाब मांगा गया है।”

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