दुनिया भर में भारतीय दूतावासों ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया

वाशिंगटन/ओटावा, 8 नवंबर : दुनिया भर में भारतीय दूतावासों ने देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रवासी भारतीय समुदाय में राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को उजागर करने के लिए सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और समारोहों का आयोजन किया।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित और उनके उपन्यास आनंदमठ में पहली बार शामिल यह गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक नारा बन गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इसकी 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर साल भर चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया।

वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने 7 नवंबर को प्रवासी छात्रों द्वारा आयोजित सामूहिक गायन के माध्यम से इस मील के पत्थर को चिह्नित किया। वहीं, ओटावा में उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने भारतीय समुदाय और अधिकारियों के साथ राष्ट्रगीत का नेतृत्व किया। इस अवसर पर ओडिसी नृत्य का प्रदर्शन भी हुआ। मिशन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस अमर स्तुति का सम्मान करते हुए वे “आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और पुनरुत्थानशील विकसित भारत 2047 के प्रति अपने संकल्प की पुष्टि करते हैं”।

दूसरी जगहों पर भी उत्सव का आयोजन हुआ। दोहा में राजदूत विपुल ने राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन कराया, जबकि रियाद में राजदूत सुहेल एजाज खान ने भारतीय समुदाय के साथ गीत गाया और मातृभूमि के प्रति गर्व व्यक्त किया। कैनबरा स्थित उच्चायोग ने पर्थ में सामुदायिक सभा आयोजित की, जहां उच्चायुक्त डी. पी. सिंह ने राष्ट्रगीत का नेतृत्व किया। सोशल मीडिया पोस्ट में मिशन ने बताया कि इस समारोह में आईएएसवी त्रिवेणी पर सवार तीनों सेनाओं की महिला दल की सदस्य भी शामिल थीं, जो समुद्र के पार भारत की एकता, नारी शक्ति और भावना का प्रतीक है।

लंदन, नेपाल, पेरू, चिली, अर्जेंटीना, कोलंबिया, दुबई, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों में भी भारतीय मिशनों ने राष्ट्रगीत के 150वें वर्षगांठ पर कार्यक्रम आयोजित किए।

भारत की संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को ‘वंदे मातरम’ को आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि यह गीत “हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है और भविष्य को नया साहस देता है”, और हर युग में इसकी प्रासंगिकता बनी रहती है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब दुश्मन ने आतंकवाद के माध्यम से भारत पर हमला किया, तब देश ने दुर्गा का रूप धारण करके इसका मुकाबला किया।

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