लखनऊ, 4 नवंबर : उत्तर प्रदेश के मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के सर्वांगीण विकास और मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि उन्हें वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध हो सके।
डॉ. निषाद ने विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मछुआ दुर्घटना बीमा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे अधिक से अधिक मत्स्य पालक इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिनमें उन्हें मत्स्य पालन की नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी दी जाए, ताकि उत्पादन बढ़े और नुकसान की संभावना कम हो।
मत्स्य विकास मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत चयनित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सेक्टर की योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध बजट का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
उन्होंने कहा कि अनुपयुक्त जल क्षेत्रों — जैसे वेटलैंड, खारे पानी के जलक्षेत्र, जलाशय और नदियों — को भी मत्स्य विकास कार्यक्रमों के दायरे में लाया जाए। डॉ. निषाद ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य मछुवारों और मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति सुधारना और उन्हें स्वावलंबी बनाना है।
बैठक में पीएमएमएसवाई की पेंडिंग परियोजनाओं, केसीसी और बीमा योजनाओं की प्रगति, फेडरेशन व कोऑपरेटिव की स्थिति, रिवर रैंचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत सीड क्वालिटी और वितरण रिपोर्ट, तथा निषादराज बोट योजना की अद्यतन प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में प्रमुख सचिव मत्स्य विकास श्री मुकेश मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुंचे और महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया।
महानिदेशक मत्स्य श्रीमती धनलक्ष्मी के. ने मंत्री को आश्वस्त किया कि दिए गए सभी निर्देशों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में निदेशक मत्स्य एन.एस. रहमानी, उप निदेशक पुनीत कुमार, उप निदेशक एजाज अहमद सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
डॉ. निषाद ने अंत में कहा कि “मत्स्य पालन न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त माध्यम है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर भी है। सरकार हर मत्स्य पालक तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।”
