सबरीमला सोना विवाद: आरोपी ने मूर्तियों से की दो किलोग्राम सोने की हेराफेरी, एसआईटी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

पत्तनमथिट्टा (केरल), 17 अक्टूबर :केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर से जुड़े बहुचर्चित सोना हेराफेरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दाखिल की गई रिमांड रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने मंदिर की द्वारपालक (संरक्षक देवता) की मूर्तियों से वर्ष 2019 में इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बहाने करीब दो किलोग्राम सोना गायब कर दिया।

इस मामले में एसआईटी अधिकारी एस. शशिधरन ने शुक्रवार को रन्नी स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में रिपोर्ट दाखिल की। अदालत ने आरोपी पोट्टी को 30 अक्टूबर तक एसआईटी की हिरासत में भेज दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पोट्टी ने 2004 से 2008 के बीच मंदिर में पुजारी सहायक के तौर पर कार्य किया था और उसे यह जानकारी थी कि वर्ष 1998 में द्वारपालकों की मूर्तियों की तांबे की प्लेटों पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। इसी जानकारी का लाभ उठाकर उसने धोखाधड़ी और निजी लाभ की मंशा से मंदिर की परंपरा को तोड़ा और देवस्वोम बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2019 में पोट्टी ने इन प्लेटों की “मरम्मत” के नाम पर मंदिर प्रशासन से अनुमति ली और फिर इन्हें कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और अंततः चेन्नई के अंबत्तूर स्थित ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ नामक स्थान पर ले जाया गया। वहीं पर सोने की परत को हटाकर उसमें से अधिकांश सोना अवैध रूप से निकाल लिया गया, जबकि दिखावे के लिए केवल 394.9 ग्राम सोना फिर से प्लेट पर चढ़ाया गया।

एसआईटी की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि मूर्तियों की ये प्लेटें बिना किसी सुरक्षा या धार्मिक अनुमति के चेन्नई, बेंगलुरु और केरल के कई मंदिरों और घरों में ले जाई गईं। यह मंदिर की परंपराओं के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

पोट्टी ने कथित तौर पर अन्य दानकर्ताओं से भी सोने की परत चढ़वाने के लिए सहयोग मांगा, लेकिन उस दान में प्राप्त सोने का भी पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया।

एसआईटी को गुरुवार को जानकारी मिली थी कि पोट्टी फरार हो सकता है, और जब उससे संपर्क किया गया तो उसका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद अपराध शाखा के उपाधीक्षक सुरेश बाबू ने उसे दोपहर 12 बजे उसके घर से हिरासत में लिया।

इस मामले में पोट्टी समेत 10 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 403 (गबन), 406 (विश्वासघात), 466 और 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत केस दर्ज किया गया है।

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