देहरादून, 11 अक्टूबर — उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने पेपर लीक प्रकरण के चलते 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह निर्णय आयोग की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आयोग अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
इस परीक्षा के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में 416 पदों पर भर्ती की जानी थी, जिसमें एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। लेकिन परीक्षा के दौरान हरिद्वार स्थित एक केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पन्नों के लीक हो जाने की घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया।
क्या हुआ था?
अभ्यर्थी खालिद मलिक ने परीक्षा के दौरान कथित रूप से मोबाइल फोन से प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें खींचीं और अपनी बहन साबिया को भेजीं। साबिया ने इन तस्वीरों को टिहरी की सहायक प्रोफेसर सुमन को भेजा, जिन्होंने उत्तर तैयार कर एक अन्य व्यक्ति को भेजे। उस व्यक्ति ने मामले को आयोग या पुलिस को बताने के बजाय सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र के पन्ने अपलोड कर दिए, जिससे वे वायरल हो गए।
इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने पुलिस अधीक्षक जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसने खालिद और साबिया को गिरफ्तार कर लिया। मामले में अब तक चार अन्य लोगों को निलंबित भी किया गया है।
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सेवानिवृत्त न्यायाधीश यूसी ध्यानी की अध्यक्षता वाले एकल सदस्यीय जांच आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह निर्णय परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।”
धामी ने आगे कहा कि सरकार ने इस मामले की CBI जांच की सिफारिश कर दी है और छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि परीक्षा तीन माह के भीतर दोबारा कराई जाएगी और यह निर्णय अन्य परीक्षाओं के कार्यक्रम पर असर नहीं डालेगा।
बेरोजगारों की जीत
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले युवाओं ने इस पेपर लीक कांड के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया था। सरकार द्वारा CBI जांच की संस्तुति और अब परीक्षा निरस्त होने से उनकी दो प्रमुख मांगें पूरी हो चुकी हैं।
इधर, आयोग ने 5 और 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली अन्य परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया है और जल्द ही उनका नया शेड्यूल जारी किया जाएगा।
यह घटनाक्रम एक बार फिर से राज्य की परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है, जिसे दूर करने के लिए अब सरकार पर कड़े कदम उठाने का दबाव है।
